स्मार्ट पड़ताल: कौन खा रहा गरीबों की दवाएं

Malay, Last updated: 03/05/2019 06:29 PM IST
एक निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी करने वाले सुरेश कुमार गर्दनीबाग अस्पताल के जन औषधि केंद्र पहुंचे। उन्हें कई दिनों से खांसी सता रही है। उन्होंने सोचा एक सीरप ले लेंगे तो राहत मिलेगी। केंद्र पर जवाब...
आम आदमी के लिए खुले जन औषधि केंद्र ही बीमार

एक निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी करने वाले सुरेश कुमार गर्दनीबाग अस्पताल के जन औषधि केंद्र पहुंचे। उन्हें कई दिनों से खांसी सता रही है। उन्होंने सोचा एक सीरप ले लेंगे तो राहत मिलेगी। केंद्र पर जवाब मिला कि खांसी की सीरप नहीं है। 
वहीं, पहले से खड़े राहुल अपने छोटे भाई के साथ आये थे। उसको कुत्ते ने काट लिया था। राहुल ने सोचा जन औषधि केंद्र से एंटी रैबीज ले लें परंतु निराशा हाथ लगी। स्टोर पर काम करने वाले युवक ने कहा कि एंटी रैबीज नहीं है। आम आदमी को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए जन औषिध केंद्रों के हर स्टोर पर कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। 

पटना जिले में संचालित हो रहे 23 जन औषधि केंद्रों को रांची और गुड़गांव से दवाओं की आपूर्ति होती है। इसके लिए भारत सरकार ने बिहार और झारखंड के लिए एक जोनल मैनेजर की तैनाती की है। साथ ही एक मार्केटिंग अफसर भी नियुक्त किया गया है।  

दावों की हवा निकली 
दावे जो भी किये जा रहे हों, परंतु हालात ऐसे हो गये हैं कि समय से स्टोर संचालकों को जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। स्टोर संचालक खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, परंतु हालात यही बता रहे हैं। कुछ स्टोर संचालकों ने तो पिछले छह माह से दवा का कोई स्टॉक ही नहीं लिया है। 

70 की खांसी की दवा 16 रुपये में
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवाएं अन्य मेडिकल स्टोर के मुकाबले काफी सस्ती हैं। जन औषधि केंद्र के एक संचालक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बाजार में खांसी का दवा 70 रुपये में उपलब्ध है। अगर खांसी की ही दवा जन औषधि केंद्र से ली जाए तो 16 रुपये में मिलेगी। पर यह दवा अक्सर स्टोर पर मिलती ही नहीं है। इसकी डिमांड भेजने के बाद भी नहीं मिलती है।

750 में 450 तरह की ही दवाएं
केंद्र सरकार ने दावा किया था कि जनऔषधि केंद्रों पर करीब साढ़े सात सौ तरह की दवाएं मिलेंगी। पटना में वर्ष 2017 से इन केंद्रों का संचालन शुरू हुआ है। अभी तक इन केंद्रों पर करीब साढ़े चार सौ तरह की ही दवाएं मिल पा रही हैं। इसमें भी कई बीमारियों की जरूरी दवाएं तो मिल ही नहीं रही हैं। 

यह कैसा जवाब
मैं विभाग का प्रवक्ता नहीं हूं : सिंह

ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयूएस ऑफ इंडिया (बीपीपीआई) के जोनल मैनेजर (बिहार-झारखंड) प्रीतम सिंह जन औषधि केंद्रों की समस्या को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पेश हैं उनसे बातचीत के  प्रमुख अंश- 

पटना जिले में कितने केंद्र चल रहे हैं, कितने बंद हो गये?
यहां मेरी नई नियुक्ति है। मेरे पास इसका कोई डाटा नहीं है।

क्या स्टोर संचालकों को समय से दवाओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है?
मैं विभाग का प्रवक्ता नहीं हूं। आप इस बारे में मुख्यालय में बात करिए। 

एंटी रैबीज तो एक बार भी नहीं आई
जनऔषधि केंद्रों पर एंटी रैबीज तो एक बार भी नहीं उपलब्ध हो पाई है। बाजार में इस दवा की कीमत करीब 455 रुपये है। अगर यह जन औषधि केंद्र पर आ जाए तो 243 रुपये में लोगों को मिल सकती है। कई बार मंगाने के बाद भी आज तक यह दवा पटना में उपलब्ध नहीं हो पाई है।

डायबिटीज और रक्तचाप की दवाओं की कमी
डायबिटीज,रक्तचाप जैसी बीमारियों की ऐसी दवाओं की कमी है,जो ज्यादा बिकती हैं। राजीव नगर स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक अजीत सिंह के मुताबिक इस तरह की दवाएं मांग से काफी कम उपलब्ध करायी जा रही हैं। जो दवाएं पहले से उपलब्ध होती हैं, उसी को फिर से भेज दिया जाता है।

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें