महंगाई की मार: कहीं फीका न कर दे इसबार होली का त्योहार

Malay, Last updated: 07/03/2020 04:02 PM IST
होली के त्योहार पर इस बार महंगाई की जबरदस्त मार पड़ी है। खाद्य सामग्रियों की आसमान छूती कीमतें राजधानी में इस वर्ष होली की मिठास फीकी करती दिख रही हंै। होली के समय दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में...
पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल होली के त्योहार में हरेक सामान की कीमतें हैं आसमान पर

होली के त्योहार पर इस बार महंगाई की जबरदस्त मार पड़ी है। खाद्य सामग्रियों की आसमान छूती कीमतें राजधानी में इस वर्ष होली की मिठास फीकी करती दिख रही हंै। होली के समय दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। पिछले वर्ष की होली के मुकाबले इस साल इस त्योहार में हरेक सामान की कीमतें बढ़ी हंै। दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल बाजारों में अधिक रौनक भी नहीं है। 

शादी-विवाह के मौसम में होली 
शादी-विवाह के मौसम के बीच होली का त्योहार पड़ना भी महंगाई की एक वजह है। सरसों का तेल, डालडा, रिफाइंड के भाव पिछले 10-15 दिनों के अंदर आसमान पर पहुंच गये हैं, जिससे गरीबों की होली फीकी नजर आ रही है। महंगाई की रफ्तार ने गरीब और मध्यमवर्ग का बजट बिगाड़ दिया है। स्टेशन रोड स्थित प्रसिद्ध पटना किराना के दिनेश कुमार सिंघी ने बताया कि होली के तीन दिन बचे हैं, लेकिन ग्राहकों की भीड़ नजर नहीं आ रही है। जो लोग सामान खरीदने आ भी रहे हैं, वे बहुत कम मात्रा में सामग्री ले रहे हैं। घी, तेल, रिफाइंड और मेवा की बिक्री इसबार बहुत कम है। इसका सबसे बड़ा कारण है मंदी।

ग्राहकों को लुभा रहे साबूदाना वाले पापड़  
बदलते समय में त्योहार की परंपराएं विलुप्त होती जा रही हैं। पहले जहां होली के त्योहार पर घर की महिलाएं पापड़ और चिप्स बनाने में जुट जाती थीं। अब बदले दौर में सब कुछ बाजार में मौजूद है। गृहणियों को बाजार में आए पापड़ और कचरी काफी पसंद आ रहे हैं। यहां पर भी महंगाई की मार कुछ कम नहीं है। साबूदाना के पापड़ और कचरी की कीमत 80 से 200 रुपए है। वहीं चावल के चिप्स और पापड़ 100 रुपए किलो बिक रहे हैं। 

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