आईआईटी ने अत्यंत सस्ती संवेदनशील हाइड्रोजन गैस सेंसर विकसित की

Sunil, Last updated: Fri, 14th Feb 2020, 3:14 PM IST
आईआईटी पटना के शोधार्थी और फैकल्टी मेंबर ने एक अत्यंत सस्ती लेकिन अत्यंत संवेदनशील हाईड्रोजन गैस सेंसर विकसित की है। यह काफी लचीला, लेकिन काफी ठोस है। इतना की कहीं भी फिट हो जाए। पूरी दुनिया में पहली...
DUMMY PHOTO

आईआईटी पटना के शोधार्थी और फैकल्टी मेंबर ने एक अत्यंत सस्ती लेकिन अत्यंत संवेदनशील हाईड्रोजन गैस सेंसर विकसित की है। यह काफी लचीला, लेकिन काफी ठोस है। इतना की कहीं भी फिट हो जाए। पूरी दुनिया में पहली बार पीबीवीएफ मटेरियल से सेंसर बनाने में सफलता मिली है। यह मटेरियल नॉन-टॉक्सिक होता है और यह स्कीन में भी फिट हो जाएगा।

इस सेंसर की खासियत है कि यह वातावरण में मौजूद एक अरब पार्टिकल में एक पार्टिकल भी हाईड्रोजन की मौजूदगी को सेंस कर लेगा। जबकि अभी तक जो सेंसर मौजूद है वह 10 लाख पार्टिकल में एक पार्टिकल हाईड्रोजन के रहने पर यह सेंसर करता है। ऐसे में नया विकसित सेंसर अत्यंत शक्तिशाली है। यह सेंसर इतना छोटा है कि मनुष्य के त्वचा में भी फिट हो जाए। चूंकि नॉन-टॉक्सिक पदार्थ से बनाया गया है, इसलिए यह हानिकारक भी नहीं है। सेंसर को विकसित करनेवाले शोधार्थी व पीएचडी के छात्र दीपक पुनेठा ने बताया कि यह सेंसर पीबीडीएफ, आरजीओ(रिड्यूस ग्राफीन ऑक्साइड) और एसएनओ टू(टीन ऑक्साइड) से मिलकर बनाया गया है। भविष्य में दूसरे गैस का सेंसर बनाने के लिए भी इस फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जा सकता है।

भविष्य में ई-स्कीन के लिए बेहतर
दिन प्रति दिन वातावरण दूषित हो रहा है। ऐसे में यह सेंसर ई-स्कीन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह इतना लचीला है कि बॉडी में यह कहीं भी फिट हो सकता है। आसपास कहीं हाईड्रोजन गैस होगा तो यह सेंसर कर लेगा। अबतक जो सेंसर उपलब्ध हैं वो लचीला नहीं है।

अत्यंत सस्ता: नया विकसित सेंसर काफी सस्ता है। बिना पैकेजिंग का इसका लैब में निर्माण की कीमत से 10 से 15 रुपए है। जबकि अभी उपलब्ध हाईड्रोजन सेंसर दो से ढ़ाई हजार रुपए है।

अत्यंत विस्फोटक होता है हाईड्रोजन: हाईड्रोज के वैसे तो कई फायदें हैं, लेकिन यह ज्वलनशील होता है। यदि यह कहीं जमा हो जाए वहां विस्फोट हो जाएगा। इस गैस की खासियत होती है कि यह रंगहीन, स्वाद हीन और गंधहीन होता है। इसके पार्टिकल का आकार अत्यंत छोटा है। इसलिए इसे पहचानना मुश्किल होता है।

तीन सदस्यीय टीम ने किया है शोध: इस आविष्कार के शोधकर्ता दीपक पुनेठा है। जबकि गाइड इलेक्ट्रीकल विभाग के प्रो. सौरव कुमार पांडेय ने किया है। वहीं टीम में भौतिकी के प्रो. मनोरंजन कार भी शामिल हैं।
 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें