कारोबारी सुगमता में बढ़ा भारत का कद

Malay, Last updated: 02/11/2019 01:54 AM IST
भारत में कारोबार करना अब और आसान हो गया है। मोदी सरकार द्वारा इस दिशा में किए गए प्रयासों को अब वर्ल्ड बैंक ने भी स्वीकार किया है। वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में 14 रैंकिंग के सुधार के साथ...
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में कारोबार करना अब और आसान हो गया है। मोदी सरकार द्वारा इस दिशा में किए गए प्रयासों को अब वर्ल्ड बैंक ने भी स्वीकार किया है। वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में 14 रैंकिंग के सुधार के साथ भारत अब 63वें नंबर पर पहुंच गया है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार करने में सुगमता की रैंकिंग उस समय आई है, जब देश आर्थिक सुस्ती का शिकार है। साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी थी, तब भारत की रैंकिंग 190 देशों में 142वें स्थान पर थी। पिछले साल भारत की रैंकिंग 77 पर पहुंच गई थी।

क्यों है महत्वपूर्ण
भारत इस सूची में लगातार तीसरे साल शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देश में भी शामिल है। यह रैंकिंग ऐसे समय में आई है, जब भारतीय रिजर्व बैंक, वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), मूडीज सहित कई एजेंसियों ने आर्थिक सुस्ती को देखते हुए जीडीपी में बढ़त के अनुमान को घटा दिया है। देश में आर्थिक सुस्ती का माहौल है और अर्थव्यवस्था के लगभग सभी मोर्चों पर नकारात्मक खबरें आ रही थीं।

कैसा रहा इतिहास
मोदी सरकार जब साल 2014 में सत्ता में आई थी तो उस समय 190 देशों की रैंकिंग में भारत का स्थान 142वां था। मोदी सरकार के 4 साल तक जारी सुधार के बाद साल 2014 में भारत की रैकिंग सुधरकर 100 हो गई। हालांकि साल 2017 में भारत ईज ऑफ डूइंग सूची में फिर फिसलकर ईरान और यूगांडा से भी पीछे 130वें स्थान पर चला गया।
साल 2018 में फिर भारत की स्थिति में उछाल आया और इस सूची में यह काफी उछलकर 77वें स्थान पर पहुंच गया। वर्ल्ड बैंक की 'डूइंग बिजनेस' 2020 रिपोर्ट में भारत में किए गए सुधारों की तारीफ करते हुए कहा गया है कि इतने बड़े देश के लिहाज से यह काफी महत्वपूर्ण बात है।

क्या होता है ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
किसी भी देश के विकास के लिए यह जरूरी है कि वहां विदेशी निवेश की मात्रा अधिक हो। हालांकि इस विदेशी निवेश को हासिल करने के लिए किसी भी देश को कई मानकों पर अच्छा परफॉर्म करना होता है। इनमें सबसे बड़ा मानक है ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार करने में आसानी। इसका अर्थ देश में कारोबारी नियमों और अन्य प्रशासनिक सरलताओं से होता है। 

आर्थिक विकास के लिए है जरूरी
किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अनिवार्य है। छोटे एवं मध्यम स्तर के उपक्रम यदि किसी देश में विकास करते हैं तो फिर वह तेजी से विकास कर सकेगा। क्षेत्र के आर्थिक विकास में इन उपक्रमों की अहम भूमिका होती है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का असर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर होता है। इसके अलावा सरकार की प्रक्रिया, नियम और रेग्युलेशंस का असर स्थानीय कारोबार पर भी होता है।

भारत और चीन की प्रगति सबसे बेहतर
भारत लगातार तीसरे साल सुधार करने वाले देशों की सूची में टॉप-10 में शामिल रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत के उल्लेखनीय सुधार के प्रयासों की वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में सराहना की है। भारत ने रैंकिंग के 10 इंडिकेटर में से 7 में सुधार किया है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि टॉप-10 सुधारात्मक अर्थव्यवस्थाओं में से भारत और चीन के नेताओं ने अपनी सुधार रणनीति में डूइंग बिजनेस इंडिकेटर्स के मुख्य घटकों को अपनाया है।

विश्व बैंक करता है जारी
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक इंडेक्स है, जिसे वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी किया जाता है। यह एक ऐसा आंकड़ा है, जिसमें कई पैमाने होते हैं, जिनसे किसी भी देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की स्थिति तय होती है। बिजनेस के लिए अच्छे रेग्युलेशंस को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मानकों के लिए अहम माना जाता है। इन रेग्युलेशंस में कंस्ट्रक्शन परमिट, रजिस्ट्रेशन, क्रेडिट मिलना, टैक्स पेमेंट मेकेनिज्म आदि को शामिल किया जाता है। इन मानकों के आधार पर ही देशों की रैंकिंग तय की जाती है।

टॉप-50 में पहुंचना सरकार का लक्ष्य
सरकार ने भारत को 2020 तक 50 सर्वाधिक कारोबार सुगम देशों में शामिल कराने का लक्ष्य रखा है। इस संबंध में विश्व-बैंक में विकास अर्थशास्त्र के निदेशक सिमोन जानकोव ने कहा कि सूची में ऊपर चढ़ने की प्रतिस्पर्धा कड़ी हुई है। लेकिन भारत अगले एक दो साल में कारोबार सुगमता सूची में शीर्ष 50 देशों में शामिल होने के सही रास्ते पर है। सरकार को इसके लिए अब महत्वाकांक्षी आर्थिक सुधारों की घोषणा और उन्हें लागू करना शुरू करना होगा। हालांकि अनुमान है कि इन सुधारों का जमीन पर असर दिखने में कुछ साल का वक्त लगेगा।

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