मांगी नौकरी तो बरसा पानी, पड़ीं लाठियां

Malay, Last updated: Thu, 27th Jun 2019, 11:26 PM IST
राज्य के विभिन्न स्कूलों में तैनात कंप्यूटर शिक्षक पिछले 675 दिनों से नौकरी के स्थायीकरण की मांग को लेकर गर्दनीबाग में धरना दे रहे थे। उन्हें लगातार सिर्फ आश्वासन मिल रहे थे। गुरुवार को उनका धैर्य...
पुलिस ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

राज्य के विभिन्न स्कूलों में तैनात कंप्यूटर शिक्षक पिछले 675 दिनों से नौकरी के स्थायीकरण की मांग को लेकर गर्दनीबाग में धरना दे रहे थे। उन्हें लगातार सिर्फ आश्वासन मिल रहे थे। गुरुवार को उनका धैर्य जवाब दे गया। ये शिक्षक मुख्यमंत्री से मिलना चाह रहे थे। ऐसे में धरना दे रहे शिक्षक समूह में निकल पडे़। शिक्षकों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा दी। शिक्षक बैरिकेडिंग को तोड़ आगे बढ़ना चाह रहे थे। पुलिस ने शिक्षकों पर लाठीचार्ज कर दिया। उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। इस घटना में आधा दर्जन से ज्यादा कंप्यूटर शिक्षक घायल हो गए। हालांकि लाठीचार्ज के बाद भी शिक्षक धरना स्थल पर डटे रहे। वाटर कैनन के जद में वहां तैनात मजिस्ट्रेट एमएस खान भी आ गए और नाले में गिर गए। 

2012 से ही पढ़ा रहे हैं स्कूलों में
कंप्यूटर शिक्षक वर्ष 2012 से ही स्कूलों में पढ़ा रहे थे। इनकी संख्या 1832 है। इनकी संविदा 2017 में समाप्त हो गई। इन शिक्षकों को आउटसोर्सिंग पर रखे गए थे। इन्हें सिर्फ 5500 रुपये प्रतिमाह मेहनताना  मिलता था। इसी में वो गुजर-बसर कर रहे थे। नौकरी के दौरान इनका मेहनताना भी नहीं बढ़ाया गया। 

नौकरी स्थायी की जाने की कर रहे मांग
कंप्यूटर शिक्षकों की मांग है कि उनकी नौकरी स्थायी की जाए। उनलोगों को पुन: पढ़ाने के लिए स्कूल भेजा जाए और इस तरह से स्कूल भेजा जाए कि फिर से नौकरी से हटाए जाने का डर न हो। इसके लिए शिक्षक लगातार शिक्षा मंत्री से मिल रहे थे। लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही हाथ लग रहा था। ऐसे में पिछले दो सालों से अपनी मांग के समर्थन में गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पर धरना दे रहे थे। इस दौरान कई बार मुख्यमंत्री से मिलने की मांग वह पहले भी कर चुके थे।

2017 में ही समाप्त हो गई थी संविदा
चूंकि शिक्षकों की संविदा वर्ष 2017 में ही समाप्त हो गई है। ऐसे में उनके सामने रोजी-रोजगार का संकट हो गया। एक तो पहले से ही वेतन के रूप में सिर्फ 5500 रुपये मिल रहे थे। ऊपर से वो भी बंद हो गया। ऐसे में इन शिक्षकों को अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण करना भारी पड़ रहा है। शिक्षकों का दावा है कि आर्थिक तंगी के कारण उनके चार साथी दुनिया छोड़ कर जा चुके हैं। कई घरों में तो बच्चों की पढ़ाई तक बंद हो चुकी है।

आउटसोर्सिंग के आधार पर रखे गए थे कंप्यूटर शिक्षक
ये शिक्षक आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत थे। ऐसे में उनके सामने बहुत ज्यादा विकल्प नहीं बच रहा है। वो कोर्ट का भी दरवाजा नहीं खटखटा पा रहे हैं। आउटसोर्सिंग कंपनी और शिक्षकों के बीच हुए करार के मुताबिक इनकी नौकरी सिर्फ पांच सालों की ही थी। ऐसे में इनकी नौकरी सरकार के रहमोकरम पर भी टिकी है। समय से अपने पक्ष में कोई निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन का सहारा लिया। इन शिक्षकों को शांत कराने के लिए पुलिस को लाठी तक भांजनी पड़ी।

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