हम तो बर्बाद हो गए: यस बैंक ने खाताधारकों को महीने में 50 हजार से ऊपर की निकासी पर कहा- नो

Malay, Last updated: 07/03/2020 12:33 PM IST
पटना में यस बैंक के खाताधारकों को जैसे ही पता चला कि अब सिर्फ 50 हजार रुपए ही महीने में निकाल सकेंगे तो शाखाओं में लंबी कतार लग गई। बैंक में खड़ा हर व्यक्ति सहमा हुआ था। किसी ने बेटी की शादी के लिए...
बोरिंग रोड चौराहे के पास यस बैंक की ब्रांच में सुबह से ही खाताधारकों की भीड़ लग गई।

पटना में यस बैंक के खाताधारकों को जैसे ही पता चला कि अब सिर्फ 50 हजार रुपए ही महीने में निकाल सकेंगे तो शाखाओं में लंबी कतार लग गई। बैंक में खड़ा हर व्यक्ति सहमा हुआ था। किसी ने बेटी की शादी के लिए पैसे जमा कर रखे हैं तो किसी की जिंदगी भर की कमाई जमा है। अब उन्हें डर सता रहा है कि कहीं जमा पूंजी डूब न जाए। 

कुम्हरार के रहने वाले संतोष कुमार  के घर में बहन की शादी की तैयारियां जोरों पर है। शनिवार को बारात आनी है। बहुत सारा काम बाकी है। सब्जी, दूध, दही जैसे कईसामान भी खरीदना बाकी है। इसके अलावा टेंट से बैंड वालों तक को पैसा देना बाकी है। इन सभी कामों में तीन लाख रुपए की जरूरत है। उन्होंने एक-एक रुपए जोड़कर बहन की शादी के लिए यस बैंक में पैसा जमा कर रखा था। वे शुक्रवार को जब यह पैसा निकालने एग्जीबिशन रोड शाखा पहुंचे तो वहां लंबी कतार थी। वे भी आश्चर्यचकित हो गए कि जिस बैंक में एक-दो ग्राहक होते थे, आज वहां सैकड़ों की लंबी कतार क्यों लगी है। वह कतार में लग गए। दो घंटे बाद जब उनका नंबर आया तो उन्हें साफ कहा गया कि वे एक महीने में 50 हजार से अधिक राशि नहीं निकाल सकेंगे। अगर कोई इमरजेंसी है तो सबूत दिखाने होंगे। तब एक लाख रुपए मिल पाएंगे। उस पल तो मानों उनके पैर तले जमीन खिसक गई। अब मेरी बहन की शादी कैसे होगी? संतोष का कहना है कि सभी बैंकों से अधिक ब्याज दर  का लालच देकर खाता खुलवाया था। जिस काम के लिए पैसा जोड़ा था, आज वही नहीं मिल रहा है। संतोष अकेले नहीं हैं,  शहर में उनके जैसे हजारों लोग यस बैंक में जमा अपने पैसे के लिए परेशान हैं। 

यस बैंक के सामने दूसरे निजी बैंकों ने बिछाया जाल 
यस बैंक की दोनों शाखाओं में सुबह से ही खाताधारकों की लंबी कतार लगी रही। बैंक के अंदर हर खाताधारक अपने पैसे के लिए लड़ता दिखाई दिया। अधिकतर अपना पूरा पैसा निकालकर खाता बंद करना चाहते थे। वहीं दूसरी तरफ शाखाओं के बाहर एक दर्जन निजी बैंकों के एजेंटों ने अपना जाल बिछा रखा था। वे यस बैंक से बाहर निकल रहे हर ग्राहक को अपने बैंक में खाता खोलने के लिए लुभावनी स्कीम बता रहे थे। हर बैंक अलग-अलग छूट और लाभ का दावा कर रहा था। निराश खाताधारक सब कुछ सुनने के बाद ये कहकर आगे बढ़ जाता कि पहले पैसा तो हाथ में आने दो।

दर्द : अपने ही पैसे के लिए भटक रहे लोग
मेरे पति विदेश में काम करते हैं। उनका सैलरी अकाउंट इसी बैंक में है। ऑनलाइन  पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ तो जानकारी के लिए बैंक पहुंची। पता चला कि एक महीने में 50 हजार ही मिलेंगे। ये पैसा भी दो घंटे की मशक्कत के बाद मिला। इतने में तो महीने का खर्च भी नहीं चलेगा।
-रेणू, एनआरआई

मेरी बहन की शादी  7 मार्च को है। तीन लाख की तत्काल आवश्यकता है। बैंक वाले कह रहे हैं कि सिर्फ 50 हजार ही दे पाएंगे। अब समझ ही नहीं आ रहा कि घर की इज्जत कैसे बचाऊं। उपभोक्ताओं के साथ बैंक ने जो किया है, उसके लिए आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।
-संतोष कुमार

मैं  प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं। मेरे सैकड़ों साथियों का इस बैंक में सैलरी अकाउंट  है। प्रत्येक के  अकाउंट में लाखों रुपए हैं। अब होली पर्व पर जरूरत के अनुसार पैसा चाहिए, लेकिन बैंक 50 हजार से अधिक नहीं दे रहा है। नेट बैंकिंग और एटीएम की सुविधा भी बंद कर दी है।
-बिट्टू सिंह, पोस्टल पार्क

बोरिंग रोड में मेरा रेस्टोरेंट है। पास होने के नाते यहां खाता खुलवा लिया  था। अब पैसा डूबने का डर है। जिस प्रकार से महाराष्ट्र बैंक का हश्र हुआ, कहीं इसका भी न हो। मैं तो सारा पैसा निकालना चाहता हूं, लेकिन बैंक वाले तीन अप्रैल तक 50 हजार निकालने की बात कह रहे हैं।
-भारतभूषण, बोरिंग रोड

इसलिए ऐसा हुआ
- बड़े व्यवसायी लोन लेकर डिफॉल्टर हो जा रहे हैं। 
- निजी बैंकों में निवेशकों की कमी आ गई है। सरकार भी मदद नहीं करती है। 
- जब तक जानकारी रिजर्व बैंक को मिल रही है, लोगों का पैसा फंस जा रहा है। 
- कमजोर पड़ते बैंक व्यवसाय का मर्जर दूसरे सरकारी बैंकों में नहीं हो पा रहा है।

लगातार बैंकों की संख्या कम हो रही है।  बैंकों को मर्ज किया जा रहा है। यदि बैंक लगातार कम होते गए तो जल्द ही बैंक में पैसा रखने का भी चार्ज वसूल किया जाएगा। 
-संजय तिवारी, सचिव, बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन

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