करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं भागे मच्छर, विधानसभा पहुंचा मामला

Malay, Last updated: 07/03/2020 03:51 PM IST
डेंगू, मलेरिया, टायफाइड सहित मच्छरों से फैलने वाली अन्य वायरल बीमारियों से शहरवासियों को बचाने के लिए नगर निगम ने पिछले एक साल में करीब 12 करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर दिए, लेकिन इसके बाद भी शहर में...
वार्ड पार्षदों के यहां खराब पड़ी हैं हैंड पोर्टेबल मशीनें, अंचल कार्यालयों में मच्छररोधी दवा भी नहीं

डेंगू, मलेरिया, टायफाइड सहित मच्छरों से फैलने वाली अन्य वायरल बीमारियों से शहरवासियों को बचाने के लिए नगर निगम ने पिछले एक साल में करीब 12 करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर दिए, लेकिन इसके बाद भी शहर में मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हुआ। समस्या ऐसी कि मामला विधानसभा तक जा पहंुचा। 

शहर में बढ़ते मच्छरों का मुद्दा विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया गया। पूर्व राजद अध्यक्ष एवं मौजूदा सदस्य विधान परिषद रामचंद्र पूर्वे ने इसको लेकर सवाल किए। 26 फरवरी को उठाए गए अपने सवाल में उन्होंने कहा कि निगम मच्छरों के प्रकोप पर नियंत्रण पाने में नाकाम साबित हो गया है। शहर में मच्छररोधी दवा का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इससे लोग चर्मरोग सहित मच्छरजनित दूसरी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। फागिंग मशीन लावारिस हाल में वार्डों में फेंक दी गई हैं।

इधर,  निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि बार-बार पत्र लिखने के बाद भी अंचल कार्यालयों में मच्छररोधी दवा की खरीद नहीं हुई है। दवा नहीं होने की वजह से संबंधित वार्डों में दवा के छिड़काव का काम प्रभावित है।

वार्ड पार्षदों के यहां कई महीनों से खराब पड़ी हैं मशीनें
विभिन्न वार्डों में उपलब्ध कराई गईं हैंड पोर्टेबल मशीनों की स्थिति ठीक नहीं है। मांग और जरूरत को देखते हुए अंचलों ने इन मशीनों को वार्ड पार्षदों को उपलब्ध कराया था। वहीं पार्षदों के यहां मच्छररोधी मशीनों के रखरखाव के प्रति गंभीरता नहीं बरती गई। इससे कई वार्डों में पार्षदों के घर हैंड पोर्टेबल मशीनें खराब पड़ गईं। अंचल कार्यालयों को सूचित करने के बाद भी मशीनों की मरम्मत को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

अंचलों को नियमित मच्छररोधी दवा छिड़काव का निर्देश दिया गया है। अगर किसी अंचल में दवा की कमी है तो उसे जल्द ही मंगाया जाएगा। 
-सीता साहू, महापौर पटना।

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