ब्रजेश ठाकुर समेत पांच को ताउम्र कैद

Malay, Last updated: 12/02/2020 01:51 PM IST
दिल्ली की साकेत अदालत ने बिहार के सबसे हैवानियत भरे मामलों में से एक, मुजफ्फरपुर आश्रयगृह कांड में युवतियों के साथ यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह समेत पांच को अंतिम...
ब्रजेश ठाकुर

दिल्ली की साकेत अदालत ने बिहार के सबसे हैवानियत भरे मामलों में से एक, मुजफ्फरपुर आश्रयगृह कांड में युवतियों के साथ यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह समेत पांच को अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई है। यानी वे ताजिंदगी जेल में रहेंगे। ब्रजेश ठाकुर पर 32 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने जिन पांच को ताउम्र का सजा सुनाई है उनमें ब्रजेश ठाकुर, तत्कालीन चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन दिलीप वर्मा, रवि रोशन, विकास कुमार, गुड्डु विजय,गुड्डु पटेल शामिल हैं।  

सात अन्य को उम्रकैद 
वहीं, सात अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इनमें तीन महिलाएं शामिल हंै। छह अन्य दोषियों को सात-सात साल जेल की सजा सुनाई गई है। जबकि एक महिला अभियुक्त रोजी रानी को छह महीने की सजा सुनाई गई है। साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ की अदालत गैर सरकारी संस्था सेवा संकल्प एवं विकास समिति के प्रमुख ब्रजेश ठाकुर को सामूहिक दुष्कर्म, बलात्कार, बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। अभियुक्तों पर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित आश्रयगृह में 40 से ज्यादा लड़कियों का यौन शोषण करने का अपराध साबित हुआ है।  

सजा पाने वालों में आठ महिलाएं 
अदालत से सजा पाने वाली आठ महिलाएं शाइस्ता प्रवीण, इंदू कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी चंदा देवी,नेहा कुमारी, हेमा मसीह एवं किरण कुमार शामिल है। जबकि नौवीं महिला रोजी रानी किशोर न्याय अधिनियम के तहत दोषी पाई गई है। दूसरी तरफ अदालत ने दो अभियुक्तों अश्वनी एवं रमा शंकर को अदालत ने आपराधिक साजिश बंधक बनाने का आरोपी ठहराया है। जबकि इन्हें बलात्कार के आरोप से बरी कर दिया गया है। गौरतलब है कि 2018 में यह मामला इतना चर्चित हुआ था कि इसमें बिहार सरकार की तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री एवं जनता दल(यूनाइटेड) नेता मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था। बताया गया था कि ठाकुर के तत्कालीन मंत्री के पति के साथ अच्छे संबंध थे। 

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