मुजफ्फरपुर आश्रय गृह कांड: बृजेश ठाकुर समेत 19 दोषी करार, एक बरी

Malay, Last updated: 21/01/2020 11:24 AM IST
बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में दिल्ली की साकेत अदालत ने मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर सहित 19 लोगों को दोषी करार दिया है। अदालत ने बृजेश ठाकुर को पोक्सो कानून के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न और...
Brijesh Thakur

बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में दिल्ली की साकेत अदालत ने मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर सहित 19 लोगों को दोषी करार दिया है। अदालत ने बृजेश ठाकुर को पोक्सो कानून के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न और सामूहिक दुष्कर्म का दोषी पाया। वहीं एक आरोपी को बरी कर दिया है। अब इस मामले में 28 जनवरी से दोषियों की सजा पर सुनवाई होगी। बता दें कि जिन धाराओं के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया है, उसमें बेहद कठोर सजा का प्रावधान है। 

बृजेश ठाकुर के बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति में कुछ लड़कियों के साथ यौन और शारीरिक उत्पीड़न का मामला 2018 में सामने आया था। इससे पहले शनिवार को अदालत ने मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसने दावा किया कि मामले में गवाहों की गवाही भरोसे लायक नहीं है। मामले के बारे में जानकारी रखने वाले एक वकील ने बताया कि बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यौन हमले का मामला आश्रय गृह में कुछ लड़कियों की कथित हत्या के मामले से अलग है।  जज ने कहा कि दोषियों को हायर कोर्ट में अपील करने की पूरी छूट है।

सामाजिक कल्याण विभाग के अफसर भी थे शामिल
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी बच्चियों के साथ गलत काम में संलिप्त थे। वहीं बृजेश ठाकुर, जो बिहार पीपुल्स पार्टी से विधायक भी रह चुका है, मुख्य आरोपी था। 

क्या है पूरा मामला
मुजफ्फरपुर में मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) ने पूरे बिहार में स्थित आश्रयगृहों का सोशल ऑडिट किया था। इसमें कहा गया था कि बृजेश ठाकुर द्वारा संचालित आश्रयगृह में नाबालिग लड़कियों के साथ लगातार यौन शोषण होता है। टीआईएसएस ने अप्रैल 2018 में अपनी रिपोर्ट जमा कराई थी। इसकी समीक्षा के बाद सरकार ने 31 मई, 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला सामने आने के बाद लड़कियों को आश्रयगृह से मधुबनी, पटना और मोकामा में शिफ्ट किया गया। बाद में जून में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के मेडिकल बोर्ड ने बालिका गृह की अधिकांश लड़कियों के साथ यौन शोषण होने की पुष्टि की। बालिका गृह में मौजूद 42 लड़कियों में से 34 लड़कियों के शोषण की पुष्टि हुई। लड़कियों ने अदालत के सामने अपनी आपबीती सुनाई थी कैसे उनके साथ लगातार शोषण किया जाता था। बात न मानने पर उनकी छड़ी से पिटाई होती थी। यहां गर्भवती होने पर लड़कियों का कथित तौर पर जबरन गर्भपात कराया जाता था। 

ये पाए गए दोषी
बृजेश ठाकुर के अलावा कोर्ट ने इंदू कुमारी (बालिकागृह अधीक्षक), मीनू देवी (बालिकागृह में गृह माता),  मंजू देवी (काउंसलर), चंदा देवी (बालिकागृह में गृह माता), नेहा कुमारी (नर्स),  हेमा मसीह (केस वर्कर), किरण कुमारी (सहायक), रवि कुमार, विकास कुमार (सीडब्लूसी का सदस्य), दिलीप कुमार (सीडब्लूसी का अध्यक्ष), विजय तिवारी (चालक), गुड्डू पटेल, कृष्णा राम,  रोजी रानी, रामानुज ठाकुर उर्फ मामू, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर, डॉक्टर अश्विनी, नरेश प्रसाद और साइस्ता परवीन उर्फ मधु को दोषी करार दिया। वहीं, रवि रोशन दोषी ठहराए जाने के बाद कोर्ट में ही रोने लगा और आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। इस मामले में विक्की नाम के व्यक्ति को कोर्ट ने बरी कर दिया।

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