सीता पर ‘विश्वास’ का फैसला आज

Malay, Last updated: Wed, 3rd Jul 2019, 7:51 AM IST
एक महीने से नगर निगम राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। पहले पार्षदों ने अविश्वास लाकर उपमहापौर विनय कुमार पप्पू को कुर्सी से बेदखल किया, अब बारी महापौर की है। बीते 29 जून को 26 पार्षदों ने महापौर के खिलाफ...
यह महापौर की कुर्सी है, अब देखना है कि आज से इस पर कौन बैठेगा?

एक महीने से नगर निगम राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। पहले पार्षदों ने अविश्वास लाकर उपमहापौर विनय कुमार पप्पू को कुर्सी से बेदखल किया, अब बारी महापौर की है। बीते 29 जून को 26 पार्षदों ने महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। बुधवार को उसपर मतदान होना है। अब देखना यह है कि उनके विरोध में उतरे 26 पार्षद अपने अविश्वास पर अडिग रहते हैं या नहीं। अगर वे डगमगा गए तो पटना की महापौर फिर सीता साहू ही होंगी। हालांकि, महापौर जीतें या हारें, राजनीति के इस दंगल ने शहर के कई विकास कार्य ठप कर दिए हैं। कहीं नाली खुदी पड़ी है तो कहीं सड़क। पार्षद और निगम कर्मचारी राजनीति में व्यस्त हैं, ऐसे में जनता की परेशानी कौन देखे। 

महापौर पर पार्षद कितना विश्वास करते हैं इसकी परीक्षा बुधवार को है। बांकीपुर अंचल में महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा। अगर 26 पार्षदों ने विरोध में मतदान किया तो सीता साहू से महापौर की कुर्सी छिन जाएगी। हालांकि निगम के सूत्रों की मानें तो अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में 23 पार्षद ऐसे हैं, जो महापौर के बहुत करीबी हैं। इन 23 पार्षदों ने उपमहापौर विनय कुमार के खिलाफ भी मतदान कर उनको कुर्सी से हटाया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये 23 पार्षद एक बार फिर महापौर की कुर्सी हिलाने में सफल होंगे या फिर यह एक कूटनीति के तहत हुआ है। 

महापौर पर अविश्वास की इतनी जल्दी क्यों
उप-महापौर की कुर्सी जाते ही वर्तमान से पूर्व हुए विनय कुमार ने मेयर के खिलाफ गुटबंदी शुरू कर दी थी। पार्षदों की संख्या 10 से 15 तक ही पहुंच पा रही थी। पार्षदों के विरोध में जुटने की खबर मिलते ही मेयर गुट ने अपनी चाल चल दी। उन्होंने अपने ही पार्षदों से अविश्वास लाकर विरोधियों को चारों-खाने चित्त करने की कोशिश की है। 

सुनने में तो यह भी आ रहा
दिनभर निगम की सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों और पार्षदों के साथ बैठकर योजनाओं पर चर्चा करने वाले आखिर महापौर के विरोधी कैसे हो गए?  

जानकारों के अनुसार जो 26 पार्षद महापौर के विरोध में अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं, उनमें से 23 तो उनके समर्थक गुट के ही कहे जाते हैं। 

आशंका यह भी जतायी जा रही है कि आज जैसे ही वोटिंग शुरू होगी उप-महापौर की कुर्सी गिराने वाले पार्षद मीटिंग से गायब हो जाएंगे। सूचना यह भी है कि सात पार्षदों को देश भ्रमण पर भी भेजा जा चुका है।

चर्चा में है कि पटनासिटी के वार्ड 69 के पार्षद विकास कुमार मौर्य पूरे दिन महापौर के चैंबर में बैठने वालों में से हैं। अचानक से आखिर वे कैसे विरोधी गुट में शामिल हो गए।

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