पटना

पहेली बन गया पटना का पानी

Malay, Last updated: 23/11/2019 06:58 PM IST
पटना का पानी साफ है या गंदा यह एक पहेली बन गई है। पानी की जांच करने वाले भारतीय मानक ब्यूरो और पीएचईडी के अपने-अपने दावे हैं। मानक ब्यूरो जहां पानी को गंदा बता रहा है, वहीं पीएचईडी का कहना है कि पटना...
नल से पानी लेता एक व्यक्ति।

पटना का पानी साफ है या गंदा यह एक पहेली बन गई है। पानी की जांच करने वाले भारतीय मानक ब्यूरो और पीएचईडी के अपने-अपने दावे हैं। मानक ब्यूरो जहां पानी को गंदा बता रहा है, वहीं पीएचईडी का कहना है कि पटना के लोग साफ पानी पी रहे हैं। मानक ब्यूरो की जांच पर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पीएचईडी का दावा है कि वह 16 बिंदुओं पर जांच करती है, जबकि मानक ब्यूरो ने महज चार बिंदुओं पर ही रिपोर्ट को निपटा दिया।  

पीएचईडी विभाग की स्टेट लेवल वाटर टेस्टिंग लेबोरेट्री के अनुसार शहर का ग्राउंड वाटर इतना भी प्रदूषित नहीं है कि इसे इस्तेमाल में नहीं लाया जाए। इसने राजधानी के 120 स्थानों से सप्लाई पानी का सैंपल प्राप्त किया है। इसमें अबतक 50 सैंपल की जांच हो चुकी है, जो पानी की शुद्धता को लेकर आई रिपोर्ट से पूरी तरह अलग है। जिन चार कैटगरी की जांच कर देशभर के शहरों की रिपोर्ट जारी की गई, वह सवालों के घेरे में है, क्योंकि चार नहीं 16 कैटेगरी में पानी की जांच होती है। छज्जूबाग स्थित पीएचईडी की लैब यही कर रही है। मगर पटना के पानी की जिन चार कैटेगरी की जांच की जा रही है, उसमें सिर्फ बैक्ट्रिया और इकोलाई ही मानक से अधिक मिल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार की लैबोरेट्री पानी को गंदा मामने से इंकार कर रही है। 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
- गंगा में गंदगी के कारण आर्सेनिक का स्तर बढ़ा है। आज से 30 से 40 साल पहले ऐसा नहीं था। 
- खेतों में अधिक पैदावार के लिए डाले जा रहे पेस्टिसाइड के कारण भी जमीन के अंदर का पानी प्रदूषित हो रहा है। 
- बारिश, सीवेज और कूड़ा एक साथ मिल जाने से बारिश का पानी जो चापाकल, ट्यूबवेल सहित अन्य पाइप से जमीन के अंदर पहुंचा, उसमें बैक्ट्रिया अधिक है। 
- जमीन के पानी का लगातार दोहन हो रहा है। लेयर नीचे चले जाने से बारिश के बाद ऊपर भरने वाला पानी प्रदूषित रहता है। 
- जलजमाव के बाद जमीन के अंदर पहुंचा पानी साफ होने में अभी अगले बारिश तक का वक्त लगना तय है। 
- प्रो. बीके मिश्रा, सेवानिवृत भूगर्भशास्त्र विभाग

इस तरह समझें पानी की शुद्धता को
प्रयोगशाला के जांचकर्ता की मानें तो टोटल हार्डनेस और अल्कलिनिटी प्रति लीटर 200 से 600 मिली ग्राम के बीच होनी चाहिए, जो अब तक के सैंपल की जांच में सही पाया गया है। सिर्फ कॉलिफॉर्म ऑर्गेंनिज्म में बैक्ट्रिया और इकोलाई की मात्रा अधिक मिल रही है। 

जहां भी लेयर कम पानी है प्रदूषित
राजधानी में जिन इलाकों में चापाकल और ट्यूबवेल का लेयर कम है, वहां अब भी गंदा पानी मिल रहा है। 150 फीट के अंदर का पानी पीने लायक है। नाला और बड़े सीवर लाइन के बगल में गाड़े गए चापाकल का पानी भी दूषित है। दर्जनभर मोहल्ले से पानी का सैंपल प्राप्त किया गया है।

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