कोरोना का प्रभाव: स्कूल, कॉलेज बंद तो कहां से बिकेंगी किताब और कॉपियां

Malay, Last updated: Mon, 23rd Mar 2020, 9:30 AM IST
दोपहर तीन बजे खजांची रोड बाजार में स्टेशनरी सामान के थोक बिक्रेता मो. एहसान और उनके कर्मचारी इरफान खुदरा व्यापारियों, ग्राहकों की राह देख रहे हैं। मार्च का महीना होने के चलते तीन माह पहले ही किताबें,...
कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए एहतियातन बंद पड़े शैक्षणिक संस्थानों से बाजार पर असर

दोपहर तीन बजे खजांची रोड बाजार में स्टेशनरी सामान के थोक बिक्रेता मो. एहसान और उनके कर्मचारी इरफान खुदरा व्यापारियों, ग्राहकों की राह देख रहे हैं। मार्च का महीना होने के चलते तीन माह पहले ही किताबें, स्टेशनरी सामान का स्टॉक जुटाए थे, पर कोरोना के खौफ से इस बार पूरा बाजार चौपट कर दिया है। ये किस्सा सिर्फ मो. एहसान का ही नहीं बल्कि खजांची रोड के 500 से ज्यादा थोक व खुदरा दुकानदारों का है। कारोबारियों का कहना है कि खजांची रोड स्टेशनरी बाजार में लगभग 500 थोक व खुदरा दुकानें हैं। जिसमें बिहार के सभी जिलों से खरीदार सुबह से ही आने लगते थे, लेकिन इस समय बाजार में सन्नाटा पसरा है। पहले रोजाना यहां 50 लाख से ज्यादा कारोबार होता था लेकिन कोरोना की वजह से 90 फीसदी कारोबारा में कमी आई है।

स्कूल, कॉलेज, र्कोंचग, हॉस्टल बंद होने से पड़ा असर
कारोबारियों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से एहतियातन राज्य सरकार ने स्कूल, कॉलेज, र्कोंचग,हॉस्टल समेत अन्य शिक्षण शिक्षण संस्थान को 31 मार्च तक बंद करने का आदेश दिया है। कारोबारियों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से सरकार ने स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, र्कोंचग समेत सभी शिक्षण संस्थान 31 मार्च तक बंद करने का निर्णय लिया है।

व्यापारियों की पीड़ा
पेंसिल, पेन समेत अन्य स्टेशनरी सामानों का थोक व खुदरा व्यापारी हूं। मार्च का महीने में मात्र एक सप्ताह बचे हैं। अभी तक इस माह में 50 हजार रुपये तक का मेरा कारोबार नहीं हो पाया है। मेरी दुकान में पांच कर्मचारी काम करते हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि कर्मचारियों की सैलरी कहां से दूंगा। 
-रंजीत कुमार

प्रतियोगी परीक्षा की किताबों का थोक व्यापारी हूं। आम दिनों में हर दिन मेरा एक लाख का व्यापार हो जाता था। लेकिन कोरोना वायरस के कारण स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल बंद होने से मेरा व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। दिनभर में दो- तीन हजार रुपये की किताबें बिक रही है। 
- मुकेश कुमार

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें