जीवन यापन के साधन पर पड़ता ग्रहों का प्रभाव

Malay, Last updated: 14/03/2020 05:44 PM IST
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्र की राशि वृष या तुला में शनि उपस्थित हों एवं शुक्र से शनि का किसी प्रकार सम्बन्ध हो तो शनि के वृष या तुला राशि में गोचर के समय व्यक्ति विलासिता एवं सौन्दर्य से...
प्रतीकात्मक तस्वीर

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्र की राशि वृष या तुला में शनि उपस्थित हों एवं शुक्र से शनि का किसी प्रकार सम्बन्ध हो तो शनि के वृष या तुला राशि में गोचर के समय व्यक्ति विलासिता एवं सौन्दर्य से सम्बन्धित क्षेत्र में नौकरी करता है। बुध की राशि मिथुन और कन्या से जब शनि का गोचर होता है, उस समय राशि से सम्बन्ध होने पर यह व्यक्ति को व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता दिलाता है। 

यही नहीं, बुध के साथ शुभ सम्बन्ध होने पर शनि व्यक्ति को जनसम्पर्क के क्षेत्र, लेखन एवं व्यापार में कामयाबी दिलाता है। इन ग्रहों योग वाले जातक यदि जनसंपर्क, लेखन या व्यापार के क्षेत्र में जाते हैं उनमें सफलता हासिल करने की उम्मीद कई गुना बढ़ जाती है। 

शनि स्वराशि यानी मकर या कुंभ में हो तो गोचर में शनि के आने पर व्यक्ति को नौकरी मिलती है अथवा वह अपना कारोबार शुरू करता है। इस राशि में शनि होने पर व्यक्ति को प्रबंधन के क्षेत्र में सफलता मिलती है। मंगल की राशि मेष अथवा वृश्चिक में शनि होने पर मशीनरी, अभियंत्रिकी एवं निर्माण क्षेत्र में कामयाबी मिलती है। मंगल और शनि का गोचर इन क्षेत्रों में लाभ दिलाता है। ऐसे लोग बीटेक, आईटीआई, टेक्नीशियन आदि के जरिए अपना कॅरियर बना सकते हैं, क्योंकि ज्योतिष के अनुसार इन लोगों को जल्द सफलता प्राप्त होने की उम्मीद रहती है। 

शुक्र ग्रह की सुस्त चाल नष्ट करती दाम्पत्य सुख
जीवन के सुख के बारे में लाल किताब की अपनी मान्यताएं हैं। ज्योतिष की इस विधा में वैवाहिक जीवन के सुख के विषय में अनेक योग का जिक्र किया गया है। इसके अनुसार विवाह और वैवाहिक सुख के लिए शुक्र सबसे अधिक जिम्मेदार ग्रह होता है। आइये, आपको बताते हैं कि लाल किताब शुक्र को लेकर क्या-क्या कहती है। यदि शुक्र जन्म कंुडली में सोया हुआ है तो स्त्री सुख में कमी आती है। राहु अगर सूर्य के साथ योग बनाता है तो शुक्र मंदा हो जाता है जिसके कारण आर्थिक परेशानियों के साथ साथ स्त्री सुख भी बाधित होता है। लाल किताब में लग्न, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम भाव को बंद मुट्ठी का घर कहा गया है। इन भाव के अतिरिक्त किसी भी अन्य भाव में शुक्र और बुध एक दूसरे के आमने सामने बैठे हों तो शुक्र पीड़ित होकर मन्दा प्रभाव देने लगता है। शुक्र यदि द्वादश भाव में होता है तो मन्दा फल नहीं देता है। कंुडली में खाना संख्या एक में शुक्र हो और सप्तम में राहु तो शुक्र को मंदा करता है जिसके कारण दाम्पत्य जीवन का सुख नष्ट होता है।

घर में कच्चा छोड़ दें थोड़ा आंगन
लाल किताब के टोटके के अनुसार इस स्थिति में गृहस्थ सुख के लिए घर का फर्श बनवाते समय कुछ भाग कच्चा रखना चाहिए। लाल किताब के अनुसार ग्रह अगर एक-दूसरे से छठे और आठवें घर में होते हैं तो टकराव के ग्रह बनते हैं। सूर्य और शनि कंुडली में टकराव के ग्रह बनाते हैं, तब भी शुक्र मंदा फल देता है जिससे गृहस्थी का सुख प्रभावित होता है। पति-पत्नी के बीच वैमनस्य और मनमुटाव बना रहता है।

अन्य खबरें