मिट्टी में मिल गए आपके 50 लाख रुपये

Malay, Last updated: 07/07/2019 12:05 AM IST
जनता के पैसे की बर्बादी देखनी हो तो एक बार पटना नगर निगम कार्यालय हो आइए। यहां वर्ष 2014 में जनता के दिए टैक्स से 50 लाख रुपए खर्च कर एक सार्वजनिक डीलक्स शौचालय बनवाया गया था। यह शौचालय निगम में आने...
नगर निगम के पास फैला यह मलबा 50 लाख रुपए का है।

जनता के पैसे की बर्बादी देखनी हो तो एक बार पटना नगर निगम कार्यालय हो आइए। यहां वर्ष 2014 में जनता के दिए टैक्स से 50 लाख रुपए खर्च कर एक सार्वजनिक डीलक्स शौचालय बनवाया गया था। यह शौचालय निगम में आने वाली जनता और कर्मचारियों के लिए था। पिछले चार साल से इसको संचालित करने के लिए कंपनी की तलाश चल रही थी, लेकिन कोई मिला नहीं। यही कारण है कि जब से इसका निर्माण हुआ, तब से ताला लटका रहा। अब इसे निगम के सौंदर्यीकरण के लिए तोड़ दिया गया है। जनता का पैसा कुछ इस तरह मिट्टी में मिल गया।

यह कोई अतिक्रमण का मलबा नहीं है, जनता की गाढ़ी खून—पसीने की कमाई का अंश है। जो टैक्स राज्य सरकार को आम जनता जमा करती है, उसी से विकास कार्य किए जाते हैं। शहर में सार्वजनिक शौचालय नहीं थे, जिससे आमजन को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को खत्म करने के लिए पुल निर्माण विभाग ने वर्ष 2014 में 32 सार्वजनिक डीलक्स शौचालय बनवाए। ये सभी शौचालय ऐसी जगहों पर बनवाए गए, जहां जनता का आवागमन बहुत अधिक था। इसी तारतम्य में एक शौचालय मौर्यालोक में संचालित नगर निगम मुख्यालय में मौर्या टॉवर के पीछे बनवाया गया, क्योंकि यहां हर दिन हजारों की संख्या में जनता आती है, लेकिन एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं था। 

तोड़ दिया गया शौचालय
निगम मुख्यालय में सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। महापौर से लेकर कर्मचारियों तक के कमरों की मरम्मत और नवनिर्माण चल रहा है। इसी कार्य के तहत एक सप्ताह पहले मौर्यालोक परिसर में बने सार्वजनिक शौचालय को जेसीबी से ढहा दिया गया। 

अब कहां जाएगी जनता
निगम मुख्यालय में हर दिन लगभग दो हजार लोग अलग-अलग आवेदन लेकर आते हैं। मौर्यालोक में सैकड़ों दुकानें संचालित हैं, जिसमें 8-10 हजार लोग प्रतिदिन आते हैं। यहां शौचालय के लिए यही एक मात्र व्यवस्था थी, जिसे तोड़ दिया गया।

पुल निर्माण विभाग ने गलत जगह पर शौचालय बना दिया था। इसकी वजह से लोगों को मुख्यालय आने जाने में परेशानी हो रही थी। मौर्यालोक परिसर का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, इसलिए शौचालय को तोड़ना पड़ा।
-देवेंद्र तिवारी, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम पटना

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