यातायात नियम तोड़ने वालों को जागरूक करने के लिए बनाया गया प्रशिक्षण केंद्र खाली

Sunil, Last updated: Fri, 6th Mar 2020, 11:32 AM IST
पटना शहर में यातायात नियम तोड़ने वालों को जागरूक करने के लिए बनाया गया प्रशिक्षण केंद्र खाली है। यहां अब लोगों को नहीं भेजा जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि शहर के लोग अब ट्रैफिक नियम नहीं तोड़ रहे...
traffic challan

पटना शहर में यातायात नियम तोड़ने वालों को जागरूक करने के लिए बनाया गया प्रशिक्षण केंद्र खाली है। यहां अब लोगों को नहीं भेजा जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि शहर के लोग अब ट्रैफिक नियम नहीं तोड़ रहे हैं।

पहले की तरह ही लोग सड़क पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन उनपर कार्रवाई नहीं हो रही है। जब कार्रवाई ही नहीं होगी तो प्रशिक्षण केंद्र का खाली रहना स्वाभाविक है। 14 जनवरी को पूरे प्रचार-प्रसार के साथ सुल्तान पैलेस में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रार्इंवग एंड ट्रैफिक रिसर्च केंद्र शुरू किया गया। शुरू में तो यहां चहल-पहल रही, लेकिन चंद दिनों में ही यहां पसरा सन्नाटा सवाल खड़े करता है।

तीन कमरों के इस केंद्र में तीन लोग काम करते हैं। एक ट्रेनर, एक कंप्यूटर ऑपरेट और एक मैनेजर, मगर दिनभर इंटरनेट चलाने के अलावा इनके पास कोई काम नहीं है। सिर्फ मैनेजर विभाग के दूसरे काम में लगे रहते हैं। ट्रेनर बैठकर प्रशिक्षण के लिए आने वाले लोगों का इंतजार करते हैं। फरवरी में महज 60 से 70 लोगों को ही शहर में पकड़ा गया। कुछ ही दिन में परिवहन विभाग का सिस्टम हांफने लगा है।

इन चौराहों पर टूट रहे नियम
राजधानी के विभिन्न चौक-चौराहों पर लोगों को नियम तोड़ते पकड़ा जा रहा है। करगिल चौक, डाकबंगला, आयकर गोलंबर, हड़ताली मोड़, राजभवन मोड़ पर पूरे दिन ट्रैफिक पुलिस चौकस दिखती है। यहां गाड़ियों की जांच भी लगातार होती है, मगर सीधा जुर्माना भरकर लोगों को छोड़ दिया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस को भी इस प्रशिक्षण केंद्र की जानकारी नहीं है। इंस्टीट्यूट के कर्मी कहते हैं कि विशेष अभियान चलेगा तो लोगों को जरूर भेजा जाएगा। वर्तमान में कभी-कभार दो से तीन लोग आते हैं।

40 को दिया जाना था प्रशिक्षण
ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले 40 लोगों को यहां हर दिन प्रशिक्षण देना था। इन्हें दो बैच में बांटा गया था। केंद्र की पहली मंजिल पर 20 कुर्सी का एक प्रशिक्षण रूम बनाया गया है। इसमें दो टीवी लगाए गए हैं। इसपर देशभर में हुईं दुर्घटनाओं और यू-ट्यूब से डाउनलोड वीडियो दिखाए जाते हैं। लोगों को आगाह किया जाता है कि बिना हेलमेट के किस तरह से आपकी जान जा सकती है। पहनने पर कैसे आप सुरक्षित रहते हैं।

आंकड़ों पर एक नजर
इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राईविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च केंद्र पर 14 से 31 जनवरी के बीच 100 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। चूंकि इस दौरान ट्रैफिक का धर-पकड़ अभियान चल रहा था। सिर्फ पहले हफ्ते में यानी 14 से 20 जनवरी के बीच सबसे अधिक लोग यहां प्रशिक्षण लेने आए। इसके बाद प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या काफी कम हो गई। कभी दो तो कभी तीन से चार लोग यहां पहुंच रहे हैं। फरवरी का पूरा आंकड़ा 60 से 70 के बीच का ही है। हालांकि, यहां मौजूद मैनेजर आफाक आलम जानकारी देने से बचते हैं। कहते हैं कि हर दिन की रिपोर्ट विभाग को सौंप देता हूं। हमारे पास सूची नहीं रहती।

ट्रकों की जांच के दौरान टीम गाड़ियों की धर-पकड़ नहीं कर रही थी। अभी एक टीम उतारने की तैयारी है। जल्द ही परिवहन की तीन टीमें कार्रवाई करेंगी। होली के बाद जांच अभियान फिर से तेज किया जाना है। -अजय ठाकुर, डीटीओ पटना
 

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