सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन

Malay, Last updated: 18/02/2020 01:45 PM IST
17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थलसेना में महिलाओं को बराबरी का हक मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा कि उन सभी महिला अफसरों को तीन महीने के अंदर आर्मी में स्थायी कमीशन दिया...
Supreme court

17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थलसेना में महिलाओं को बराबरी का हक मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा कि उन सभी महिला अफसरों को तीन महीने के अंदर आर्मी में स्थायी कमीशन दिया जाए, जो इस विकल्प को चुनना चाहती हैं। अदालत ने केंद्र की उस दलील को निराशाजनक बताया, जिसमें महिलाओं को कमांड पोस्ट न देने के पीछे शारीरिक क्षमताओं और सामाजिक मानदंडों का हवाला दिया गया था।

पुरुषों को ही था अधिकार 
अभी तक आर्मी में 14 साल तक शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) में सेवा दे चुके पुरुष सैनिकों को ही स्थायी कमीशन का विकल्प मिल रहा था, लेकिन महिलाओं को यह हक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सेना में महिलाओं को पुरुष अफसरों से बराबरी का अधिकार मिल गया है। वायुसेना और नौसेना में महिला अफसरों को पहले से ही स्थायी कमीशन मिल रहा है। यह फैसला जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ व जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने सुनाया। 

मानसिकता बदलें
जजों की पीठ ने यह भी कहा कि महिलाओं की शारीरिक विशेषताओं का उनके अधिकारों से कोई सम्बन्ध नहीं है और इस तरह की सोच को बढ़ाने वाली मानसिकता अब बदलनी चाहिए। इस मामले में 2010 में ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि शार्ट सर्विस कमीशन के जरिए सेना में भर्ती हुई महिलाएं भी पुरुषों की तरह स्थायी कमीशन की हकदार हैं। केंद्र ने इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। केंद्र का कहना था कि सेना में यूनिट सिर्फ पुरुषों की है और पुरुष सैनिक महिला अधिकारियों को स्वीकार नहीं कर पाएंगे। अदालत ने सोमवार को इस दलील को खारिज कर दिया।

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