इंग्लैंड-सिंगापुर में भी फैलेगी LR अगरबत्ती की सुगंध, तेज प्रताप को मिला ऑफर

Smart News Team, Last updated: Wed, 14th Jul 2021, 8:04 PM IST
तेज प्रताप यादव अब इंग्लैंड और सिंगापुर में भी एलआर अगरबत्ती ब्रांड का शोरूम खोलने होने जा रहे हैं. उन्हें इसके लिए दोनों देशों से ऑफर मिला जिस पर उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी है. तेजप्रताप यादव ने एलआर अगरबत्ती को हाल ही में लांच किया है. उन्होंने इस अगरबत्ती का एक शोरूम फिलहाल पटना में भी खोला है.
तेज प्रताप यादव इंग्लैंड और सिंगापुर में एलआर अगरबत्ती का शोरूम खोलेंगे.

पटना. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और विधायक तेजप्रताप यादव अब इंग्लैंड और सिंगापुर में भी लालू-राबड़ी अगरबत्ती का शोरूम खोलेंगे. आपको बता दें कि तेजप्रताप यादव ने हाल ही में LR अगरबत्ती( लालू राबड़ी अगरबत्ती) के नाम से अगरबत्ती का बिजनेस शुरू किया है. LR अगरबत्ती के नाम से शुरू किए गए शोरूम को इंग्लैंड और सिंगापुर में खोलने का ऑफर तेजप्रताप को मिला है. तेजप्रताप यादव के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंग्लैंड और सिंगापुर से कई बिजनेसमैन ने तेजप्रताप से संपर्क किया है. तेजप्रताप यादव ने भी इंग्लैंड और सिंगापुर में इसका शोरूम खोलने की सहमति दे दी है, ऐसे में आने वाले कुछ महीनों में LR अगरबत्ती का शोरूम सिंगापुर और इंग्लैंड में होगा.

मालूम हो कि अगरबत्ती बनाने की तमाम मशीनें दानापुर के उस जगह पर लगाई गई हैं, जहां पहले कभी लालू प्रसाद यादव का बड़ा खटाल हुआ करता था. यहां सैकड़ों की संख्या में गायें पाली जाती थीं और दूध बाजार में बिकता था. लालू मुख्यमंत्री रहते हुए भी खटाल आते जाते रहे और गायों का खासा ध्यान रखते थे. इसी खटाल में तेजप्रताप ने अगरबत्ती का मुख्य केंद्र बनाया है और यहां सभी अगरबत्तियों का उत्पादन होता है.

लालू-राबड़ी के नाम पर तेज प्रताप का बिजनेस, LR ब्रांड की अगरबत्ती, शोरूम खुला

जानकारी के अनुसार तेजप्रताप यादव द्वारा शुरू किए अगरबत्ती के बिजनेस को तेजी से फैलाने के लिए कई वैरायटी एक साथ लाई गई हैं. दानापुर में खोले गए एक्‍सक्‍लुसिव शोरूम में 100 से लेकर 1 हजार रुपये तक का पैकेट उपलब्ध है. अगरबत्ती में चंदन, जैस्मिन, गुलाब सहित कई वैरायटी उपलब्ध है जो लोगो को आकर्षित कर रहै हैं. गौरतलब है कि यहां तैयार हो रही अगरबत्ती उन फूलों द्वारा बनाई जा रही है जो मंदिरों में चढ़ाए जाने के बाद फेंक दिये जाते हैं. पटना के सभी मंदिरों से इसे उठाकर जमा किया जाता है और फिर इससे अगरबत्ती तैयार की जाती है.

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