तेजस्वी की RJD में चिराग जलाने की कोशिश! 5 जुलाई को राजद मनाएगी रामविलास पासवान की जयंती

Smart News Team, Last updated: Sat, 26th Jun 2021, 3:15 PM IST
बिहार की वर्तमान राजनीति में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी से गठबंधन के लिए तेजस्वी यादव भरपूर कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने 5 जुलाई को राजद के 25वें स्थापना दिवस के साथ ही रामविलास पासवान की जयंती मनाने का भी ऐलान किया है. दूसरी तरफ चिराग 5 जुलाई से पूरे बिहार में आशीर्वाद यात्रा शुरू करने जा रहे हैं.
चिराग को रिझाने के लिए तेजस्वी यादव ने 5 जुलाई को रामविलास पासवान की जयंती मनाने का ऐलान किया है.

पटना. लोक जनशक्ति पार्टी(एलजेपी) में चाचा-भतीजे की लड़ाई में तेजस्वी यादव अपना हित साधने की कोशिश कर रहे हैं. दरअसल, 5 जुलाई को आरजेडी ने चिराग पासवान के दिवंगत पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की जयंती मनाने का ऐलान किया है. हालांकि उस दिन आरजेडी का 25 वां स्थापना दिवस भी है. बिहार की राजनीति में इस समय आरजेडी के लिए इसे बेहतर संयोग कहना गलत नहीं होगा. इस मौके को तेजस्वी किसी भी मौके पर गंवाना नहीं चाहते हैं. चिराग ने इस संबंध कहा कि तेजस्वी अगर मेरे पिता की जयंती मनाना चाहते हैं तो मैं उनका आभार मानूंगा. रामविलास पासवान की विचारधारा पर सबका अधिकार है.

एक तरफ जहां तेजस्वी यादव ने रामविलास पासवान की जयंती मनाने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान ने अपने दिवंगत पिता के जन्मदिन पर 5 जुलाई से उनकी कर्मभूमि रहे और वर्तमान में उनके चाचा पशुपति पारस के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर से 'आशीर्वाद यात्रा' शुरू करने की घोषणा की है.चिराग की यह आशीर्वाद यात्रा पूरे बिहार में होगी और इसके जरिए वे अपने लिए जन समर्थन की ताकत दिखाकर आगे कानूनी संघर्ष का रास्ता अपनायेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि जब चिराग आशीर्वाद यात्रा निकालकर प्रदेश के भ्रमण पर निकलेंगे तो उन्हें पर्दे के पीछे से राजद का साथ मिल सकता है. इसके पीछे का मकसद भाजपा-जदयू के मुकाबले चिराग को नई शक्ति के रूप में स्थापित करना है. हालांकि आशीर्वाद यात्रा इस पर भी निर्भर करेगी कि तब तक प्रदेश में कोरोना और लॉक डाउन की क्या स्थिति रहेगी क्योंकि भीड़ जुटाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी होगा.

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गौरतलब है कि बिहार में एलजेपी के कोर वोटरों की संख्या करीब छह से सात फीसद तक मानी जाती है. पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एलजेपी एनडीए से नाता तोड़कर अकेले मैदान में उतरी थी और उसे करीब 26 लाख(5.66%) वोट मिले थे. इस कारण तेजस्‍वी यादव चाहते हैं कि अगर चिराग उनकी तरफ आ जाते हैं, तो 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही उन्हें 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी इसका फायदा मिल सकता है.

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दूसरी तरफ तमाम कोशिशों के बावजूद आरजेडी की छवि अभी तक मुस्लिम और यादव (माय) समीकरण से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है. हालांकि विधानसभा चुनाव से पहले तेजस्वी ने लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के दायरे से आरजेडी को बाहर निकालकर सर्व समाज की पार्टी बनाने की भरपूर कोशिश की है, लेकिन अभी इस दिशा में तेजस्वी को और प्रयास करना होगा. इसके साथ ही आरजेडी को एलजेपी भाजपा से मोहभंग का भी इंतजार है, ताकि माय समीकरण के साथ एक और समूह को जोड़ा जा सके. हालांकि एनडीए से नाता टूटने के बाद चिराग को तेजस्वी यादव ने अपने साथ आने का ऑफर दे दिया था. लेकिन चिराग ने इसे स्वीकार नहीं किया था.

 

 

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