NDA पर बरसे तेजस्वी, 5 दिसंबर को किसानों के समर्थन में महागठबंधन का प्रदर्शन

Smart News Team, Last updated: 04/12/2020 09:26 PM IST
  • 5 दिसंबर को सुबह 10 बजे गांधी मैदान में कृषि बिलों के विरोध में महागठबंधन के नेता धरने पर बैठेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार जो बातचीत अब कर रही है वह कृषि कानून लाने से पहले होनी चाहिए थी.
NDA पर बरसे तेजस्वी, 5 दिसंबर को किसानों के साथ होगा महागठबंधन प्रदर्शन

पटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्र के कृषि बिलों को लेकर तीखा हमला बोला. राजद कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा के 5 दिसंबर को सुबह 10 बजे गांधी मैदान में कृषि बिलों के विरोध में महागठबंधन के नेता धरने पर बैठेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार जो बातचीत अब कर रही है वह कृषि कानून लाने से पहले होनी चाहिए थी. तेजस्वी बोले देश में प्लेन चल रहे हैं लेकिन ट्रेन नहीं. ये निम्न वर्ग के नागरिकों के साथ ठीक नहीं हो रहा है. इस देश मे सिर्फ पूंजीपतियों का बोलबाला है. तेजस्वी ने इस बात का ऐलान किया कि कल यानी शनिवार को पटना के गांधी मैदान में महागठबंधन में शामिल दल किसान आंदोलन के समर्थन में धरने पर बैठेंगे.

तेजस्वी यादव ने कहा कि केंद्र सरकार हर वो कोशिश करती है जिससे मुद्दे को भटकाया जा सके, लेकिन सवाल यह है कि एमएसपी को ही जब समाप्त कर दिया गया तो किसानों की आय दोगुनी कैसे होगी. तेजस्वी ने किसानों और संगठनों से अपील करते हुए कहा कि इस काले कानून के खिलाफ आप सड़कों पर आएं और कानून के खिलाफ मजबूत विरोध दर्ज करें. राजद नेता ने कहा कि कानून बनाने से पहले केंद्र सरकार को एक बार परामर्श करनी चाहिए थी पर सरकार ने नहीं किया. अब स्क्रिप्ट में दिखा रही है कि किसानों को फायदा होगा.

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तेजस्वी ने कहा कि बिहार के किसानों ने पलायन शुरू कर दिया है क्योंकि बिहार के किसान मजदूर बन चुके हैं. सरकार ने 2006 में ही मंडी खत्म कर दी. सही मूल्य नहीं मिल पा रहे हैं. धान को लेकर हमने विधानसभा में भी उठाया था. कहीं भी बिहार में धान की खरीद नहीं हो रही है. मुख्यमंत्री साफतौर पर झूठ बोल रहे हैं. तेजस्वी ने कहा कि सीन चौड़ा कर मुख्यमंत्री ने इस बिल का संसद में समर्थन किया था. तब मैंने कहा था कि बिहार पहला राज्य है जहां सरकार ने मंडी खत्म की है. बात अगर फंसेगी तो कितने स्तर पर उन्हें जाना पड़ेगा. वकील भी रखना पड़ेगा, कोर्ट भी जाना पड़ेगा, लेकिन कम्पनी वालों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

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अब तो सारे अवार्ड लोग वापस कर रहे हैं, फिर भी सरकार को समझ नहीं आ रहा. डेमोक्रेसी पर खतरा है. कल भी किसानों ने बातचीत के दौरान न तो पानी पीया न खाया. जब किसान आंदोलन कर रहे हैं तो लाठी से लेकर आंसू गैस छोड़े जा रहे हैं. इतनी बड़ी समस्या देश के सामने है और पीएम गायब हैं. क्या पीएम को किसानों की बात नहीं सुननी चाहिए थी.

 

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