बिहार: केमिकल से गलाई जाएगी पराली, 15 दिनों में पराली बन जाएगी खाद

Naveen Kumar Mishra, Last updated: Mon, 1st Nov 2021, 6:24 AM IST
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने चार कैप्सूल का एक पैकेट तैयार किया है इसकी कीमत बीस रूपए रखी गई है. दिल्ली में बायोडिकंपोजर का उपयोग सफल रहा था. इसी को देखते हुए बिहार सरकार ने कृषि विभाग के अधिकारियों को इस योजना को बिहार में भी लागू करने को कहा था.
किसानों को पराली जलाने से मिलेगी मुक्ति, फाइल फोटो

पटना। धान की फसल कटने के साथ ही पूरे बिहार में बायोडिकंपोजर का उपयोग शुरू हो जाएगा. इसके लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है और बायोडिकंपोजर का ऑर्डर दे दिया गया है. दिल्ली में बायोडिकंपोजर का उपयोग सफल रहा था. इसी को देखते हुए बिहार सरकार ने कृषि विभाग के अधिकारियों को इस योजना को बिहार में भी लागू करने को कहा था.

 

किसानों को पराली प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी

खेतों में अगर प्रत्यक्षण सफल रहा तो किसानों को पराली प्रबंधन की इस नई योजना के बारे में जानकारी दी जाएगी. पहले हुई प्रयोग के अनुसार 15 दिनों में पराली गल कर खाद बन जाएगा. प्रयोग सफल होने के बाद बीस रूपए की कैप्सूल से पराली प्रबंधन की समस्या दूर हो जाएगी. राज्य में यह प्रयोग सफल होने के बाद किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पराली काटकर खतियान में ले जाने का खर्च भी बचेगा. इससे प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगा और खेतों की मिट्टियों की गुणवत्ता भी पड़ेगी.

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कैसे तैयार होगा पराली जलाने वाला केमिकल

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने चार कैप्सूल का एक पैकेट तैयार किया है इसकी कीमत बीस रूपए रखी गई है. मिली जानकारी के अनुसार चार कैप्सूल से 25 लीटर का घोल तैयार किया जा सकता है और इसे एक हेक्टेयर में छिड़काव किया जा सकता है. इसके इस्तेमाल के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि 5 लीटर पानी में 100 ग्राम गुड़ उबालकर उसे ठंडा होने का इंतजार करना है. गोल ठंडा होने के बाद उसमें 50 ग्राम बेसन मिलाकर कैप्सूल को घोल देना है. तैयार कैप्सूल के घोल को 10 दिनों तक किसी अंधेरे कमरे में रखना है, इसके बाद यह घोल पराली पर छिड़काव के लिए तैयार हो जाता है.

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