बिहार में हो रही दुनिया की सबसे महंगी सब्जी की खेती, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

Smart News Team, Last updated: Sat, 6th Feb 2021, 1:15 PM IST
बिहार के औरंगाबाद जिले में हॉप शूट्स नाम की दुनिया की सबसे महंगी सब्जी की खेती की जा रही है. इस सब्जी की कीमत 1 लाख रुपये प्रति किलो है. इसकी सबसे अधिक डिमांड यूरोपीय देशों में है.
हॉप शूट्स(Hop Shoots). 

पटना. बिहार में दुनिया की सबसे महंगी सब्जी की खेती की जा रही है. हॉप शूट्स(Hop Shoots) नाम की इस सब्जी की कीमत 1 लाख रुपये प्रति किलो है. यह एक प्रकार का हर्ब है जिसकी डिमांड यूरोप में सबसे अधिक है. इसके अलावा विदेशी बाजारों में इसकी काफी डिमांड है और इसकी कीमत 80 से 95 लाख रुपये प्रति किलो है.

आपको बता दें कि औरंगाबाद जिले के रहने वाले किसान अमरेश कुमार सिंह इस महंगी सब्जी की खेती कर रहे हैं. गौरतलब है कि भारतीय सब्जी अनुसंधान केंद्र वाराणसी के कृषि वैज्ञानिक डॉ लाल की देखरेख में 5 एकड़ जमीन पर इसकी ट्रायल खेती की जा रही है. 2 महीने पहले इसका एक पौधा लगाया गया था जो अब धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है.

पटना: शराबबंदी पर प्रशासन सख्त, शराब मिलने पर मकान और दुकान होगी नीलाम

अमरेश ने बताया कि इसकी खेती के लिए राज्य के कृषि विभाग से अनुरोध किया गया जिसे विभाग ने मान लिया. उनका कहना है कि यदि वे इस खेती में कामयाब रहते हैं तो इससे बिहार के किसानों को काफी फायदा हो सकता. इस खेती से भी उम्मीद से कहीं अधिक कमा सकते हैं. औरंगाबाद के नवीनगर प्रखंड के करमडीह गांव में जब अमरीश में इस सब्जी की खेती की शुरुआत की लोग समझ नहीं पाए कि वे क्या बो रहे हैं. इसको लेकर लोगों के मन में कई सवाल थे कि आखिर यह सब्जी इतनी महंगी क्यों है?

जानकारी के अनुसार हॉप शूट्स का उपयोग एंटीबायोटिक दवाओं को बनाने के लिए किया जाता है इसके अलावा इसके फूलों से बीयर भी बनाई जाती है. साथ ही इसके इस्तेमाल से टीवी के इलाज में बनी दवा कारगर साबित होती है. इसकी टहनियों को उपयोग खाने में किया जाता है. इसके अलावा इसका अचार भी बनाया जाता है जो काफी महंगा बिकता है.

बिहार पंचायत चुनाव: मुखिया, सरपंच समेत सभी उम्मीदवारों के लिए सिंबल तय, जानें

ज्ञात हो कि यूरोपीय देशों में इसकी खेती काफी बड़े पैमाने पर की जाती है. अगर इसके सौंदर्य उपयोग की बात की जाए तो इसका सेवन करने से त्वचा चमकदार बनती है और झुर्रियां नहीं होती है. इसकी खोज 11वीं शताब्दी में हुई थी. तब इसका उपयोग बियर का फेवर बदलने के लिए किया जाता था.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें