Karvachauth: बिहार के चंपारण में ऐसे मनाया जाता है करवाचौथ, कुंवारी लड़कियां भी करती हैं व्रत

Priya Gupta, Last updated: Mon, 18th Oct 2021, 8:42 AM IST
  • करवा चौथ में अक्सर हमने देखा है कि छलनी से चांद देखा जाता है, पति के हाथ से पानी पीया, उनसे गिफ्ट लिया और बाहर कहीं डिनर के लिए निकल गए.
बिहार के चंपारण में ऐसे मनाया जाता है करवाचौथ

इस साल करवाचौथ 24 अक्टूबर 2021 को है. महिलाएं अपने पति के लिए व्रत रखती हैं. लेकिन अलग-अलग राज्य में करवा चौथ को लेकर कुछ अलग-अलग रिति-रिवाज है. बीते दो दशक में फिल्मों ने करवाचौथ का सिनेमाई कलेवर तैयार कर दिया है. करवा चौथ में अक्सर हमने देखा है कि छलनी से चांद देखा जाता है, पति के हाथ से पानी पीया, उनसे गिफ्ट लिया और बाहर कहीं डिनर के लिए निकल गए. लेकिन असल में करवाचौथ इससे बहुत अलग है.

राजस्थान-पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को छोड़ जब आगे आप पूर्व की तरफ बढ़ेंगे तो त्योहार का असली मकसद और सही परंपरा का भी पता चलेगा. बिहार में चंपारण इलाके में कई अलग तरह से करवाचौथ मनाया जाता है. सुदूर गांव के कई इलाके ऐसे हैं जहां परंपरा के मुताबिक क्षेत्र विशेष में यह पर्व मनाने की विधि भी अलग अलग है. पश्चिम चंपारण के उतरांचल में नेपाल के तराई इलाकों में एक जनजाति रहती है थारु.

Karwa Chauth 2021 : करवा चौथ पर दिखना चाहते हैं अलग तो फॉलो करें ये आसान टिप्स

वनों, नदियों पहाड़ों की गोद में बसे थरुहट में तीन या चार लाख की आबादी में थारु जनजाति के लोग रहते हैं. ये लोग आज भी करवाचौथ को अपने पारंपरिक विधि से ही मनाते आ रहे हैं. थारु जाति के लोग करवाचौथ को गउर पर्व कहते है. यहां की कुंवारी कन्याएं सुहागिन महिलाएं दोनों इस पर्व को काफी उत्साह के साथ मनाती है. ये परंपरा सदियों से चलती आ रही है. इस दिन व्रती नदी में स्नान कर ही घर लौटती है. उसके बाद सामूहिक रुप से दिवाल पर बनाए गए परंपरागत रंगोली के समीप बैठकर विधिवत पूजा झमटा डांस करती है.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें