Chhat Puja 2021: इस दिन से शुरू है छठ पूजा, जानें क्यों इस पूजा को कहा जाता है महापर्व

Priya Gupta, Last updated: Sun, 3rd Oct 2021, 10:02 AM IST
  • कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला यह महापर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में छठ पूजा पर एक अलग ही धूम देखने को मिलती है.
chhath puja

छठ पूजा के इस महापर्व की शुरुआत 8 नवंबर से होगी. इस महापर्व का पहला दिन नहाय खाय से शुरू होता है. हिन्दी पंचाग के अनुसार, छठ पूजा का खरना कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है. नहाय खाय के बाद खरना होता है जिसे लोहंडा भी कहा जाता है. खरना के दिन छठ पूजा के लिए प्रसाद बनाया जाता है. खरना के पूरे दिन तक उपवास रखा जाता है और फिर शाम में प्रसाद के रूप में खीर खाया जाता है. शाम के पहले अर्घ्य के साथ सुबह के दूसरे अर्घ्य के साथ छठ पूजा का समापन किया जाता है. यह चार दिनों का त्योहार है और इसमें साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है. इस त्योहार में गलती की कोई जगह नहीं होती. इस व्रत को करने के नियम इतने कठिन हैं, इस वजह से इसे महापर्व और महाव्रत से भी जाना जाता है.

मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर ( तालाब ) के किनारे यह पूजा की जाती है. षष्ठी मां यानी छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं. इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है.

Chhath puja 2021: छठ पूजा कब है? जानें नहाय खाय,सूर्य पूजन एवं अर्घ्य का सही समय

मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख किया है कि सृष्ट‍ि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है. इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं. वो बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को इन्हीं देवी की पूजा की जाती है. शिशु के जन्म के छह दिनों बाद इन्हीं देवी की पूजा की जाती है. इनकी प्रार्थना से बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु होने का आशीर्वाद मिलता है.पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी बताया गया है, जिनकी नवरात्रि की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है.

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