पटना में लॉकडाउन और कोविड-19 के प्रभाव से उभर नहीं पा रहा कोचिंग सेक्टर

Smart News Team, Last updated: Thu, 17th Dec 2020, 2:22 PM IST
  • कोरोनाकाल में कोचिंग सेक्टर में जीविका कमा रहे लाखों की तादाद में लोग बेरोजगार हो गए हैं. राजधानी के कई कोचिंग संस्थान तो अब दोबारा खुलने की स्थिति में नहीं हैं. सरकार ने जल्दी ही इनकी ओर ध्यान नहीं दिया तो स्थिति और बदतर हो सकती है
कोचिंग सेंटर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना. कोरोना काल में कोविड 19 और लॉकडाउन के प्रभाव से कोचिंग सेक्टर उभर नहीं पा रहे हैं. यहा काम कर रहे लाखों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं. इस सेक्टर से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े करीब 1.25 लाख लोगों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं. जिसका कारण यह है कि सरकार से फिलहाल कोचिंग सेंटरों को खोलने की इजाजत नहीं मिली है. सरकार का कहना है कि कोरोना संक्रमण की संभावना को देखते हुए सरकार से फिलहाल कोचिंग सेंटरों को खोलने की इजाजत नहीं मिली है.

राजधानी के कोचिंग सेंटरों की सरकार ने जल्द सुध नहीं ली तो स्थिति और बदतर होगी. सामाजिक कार्यकर्ता सह नेशनल यूथ अवार्डी वीरेंद्र शर्मा के मुताबिक जेईई, नीट, क्लैट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में सफलता स्कूलों व कॉलेजों में पढ़ाई के भरोसे फिलहाल संभव नहीं है. इसके लिए 99 फीसद बच्चे कोचिंग सेंटरों की ओर रुख करते हैं. कुछ शिक्षण संस्थान अपवाद हो सकते हैं. सरकार एक ही बच्चे के लिए दो नियमों पर काम कर रही है. कोचिंग सेंटर संचालकों का कहना है कि जब सरकारी स्कूल-कॉलेजों खोले जा सकते हैं तो कोचिंग सेंटरों को क्यों नहीं खोला जा सकता. सरकार को कोचिंग सेक्टर की भी सुध लेनी चाहिए.

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स्वतंत्र एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक पटना में निजी कोचिंग के बिजनेस से करीब 1500 करोड़ रुपए सालाना है. इसमें बड़े कोचिंग सेंटरों की हिस्सेदारी सिर्फ 30 फीसद है. 70 फीसद कारोबार छोटे और मंझोले कोचिंग सेंटरों की है. अक्टूबर में कराए गए सर्वे के आधार पर कोरोना की मार के कारण लगभग 80 फीसद छोटे और 70 फीसद मंझोले कोचिंग सेंटर दोबारा खुलने की स्थिति में नहीं हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार पटना में कोचिंग सेंटर का कारोबार 300 करोड़ का है. इतनी राशि पर सरकार को जीएसटी मिलता है.

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