पटना: कोरोना जांच की रफ्तार हुई धीमी, देरी से आ रही जांच रिपोर्ट

Smart News Team, Last updated: 21/11/2020 06:18 PM IST
  • चुनावी सीजन और फेस्टिवल सीजन में जिस तरह जगह-जगह पर लोगों की भीड़ को देखा गया है. उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है. चुनावों से लेकर अब तक कोरोना जांच की रफ्तार में कमी आई है जिस वजह से कम मामले सामने आ रहे हैं.
कोरोना जांच के लिए सैंपल देता व्यक्ति

पटना. चुनावी सरगर्मियों के चलते और त्योहारी सीजन में व्यस्तता के कारण राजधानी में कोरोना जांच की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है. त्योहारी सीजन में जिस तरह लोगों की भीड़ बाजारों में दिखी और चुनावों में लोगों का हुजूम देखा गया. उससे कोरोना के संक्रमण का खतरा काफी बढ़ गया है. इसके साथ ही देखा जाए तो कोरोना जांच की रफ्तार धीमी हो चुकी है, जिस कारण आंकड़े सच्चाई सामने नहीं ला पा रहे हैं. गौरतलब है कि चुनावों के पहले रोजाना दो लाख सैंपलों की जांच होती थी और दो हजार के करीब मामले सामने आ जाते थे लेकिन अब जांच की रफ्तार कम होने से 600 के करीब ही मामले सामने आ रहे हैं.

लोगों को जांच रिपोर्टों के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि कोरोना नियंत्रण में है. जैसे ही कोरोना जांच की रफ्तार बढ़ेगी, कोरोना के ज्यादा मामले सामने आएंगे. लोगों को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए और मास्क जरूर पहनना चाहिए. इसके अलावा कोरोना गाइडलाइंस का पूरी सावधानी से फॉलो करना चाहिए.

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स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का मानना है कि कोरोना टेस्टिंग मशीन खराब है. जिस कारण रिपोर्ट आने में देरी हो रही है. सवाल यह है कि अगर 15-15 दिनों तक जांच मशीन खराब रहेगी तो कोरोना जांच का मतलब क्या है? लोगों को एंटीजन टेस्ट से ही काम चलाना पड़ रहा है. देखा जाए तो स्वास्थ्य महकमे से जुड़े लोग भी एंटीजन रिपोर्ट को फूल प्रूफ नहीं मान रहे हैं. उनका कहना है कि एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद एक बार रेगुलर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.

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