Diwali 2021: समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर हुए थे प्रकट, पढ़ें रोचक कहानी

Priya Gupta, Last updated: Sun, 3rd Oct 2021, 2:02 PM IST
  • हिंदू धर्म में कहा गया है कि धनतेरस के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. अमृत कलश के अमृत का पान करके देवता अमर हो गए थे. 
: समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर हुए थे प्रकट

दिवाली के एक दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है. धनतेरस पर नए बर्तन या सोने, चांदी के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है. लेकिन इन सब के साथ ही धन का मतलब सिर्फ पैसे से नहीं होता है. धन का मतलब और इसके बारे में जानना और समझना बेहद जरुरी है. कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है.

धनतेरस की मान्यताएं

हर धर्म में धनतेरस को लेकर अलग-अलग मान्यता बताई गई है. जैन धर्म में कहा जाता है कि भगवान महावीर इस दिन ध्यान द्वारा योग निरोध के लिए चले गए थे.तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुए वे दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुए थे. तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ. वहीं हिंदू धर्म में कहा गया है कि धनतेरस के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. अमृत कलश के अमृत का पान करके देवता अमर हो गए थे. इसीलिए आयु स्वास्थ्य की कामना के लिए धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है.

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कहा जाता है कि इस दिन धन्वंतरि का जन्म हुआ था. धन्वंतरि जयंती को आयुर्वेदिक दिवस घोषित किया गया है. धन्वंतरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. धन्वंतरि के बताए गए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी उपाय अपनाना ही धनतेरस का प्रयोजन है.धन्वंतरि के अलावा इस दिन यम, लक्ष्मी, गणेश और कुबेर देव की भी पूजा होती है.कहते हैं कि धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है.

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