ईद के त्योहार में क्या है खास, जानिए कैसे और क्यों मनाते हैं रमजान के बाद ईद

Smart News Team, Last updated: Tue, 11th May 2021, 9:34 AM IST
  • रमजान खत्म होने के बाद ईद का त्योहार मनाया जाता है. रमज़ान के महीने के बाद 10वें शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है. ईद कब होगी जाएगी यह चांद के निकलने पर निर्भर करता है.
ईद के त्योहार में क्या है खास, जानिए कैसे और क्यों मनाते हैं रमजान के बाद ईद

पटना। रमज़ान का यह पाक महीना एक या दो दिनों में खत्म हो जाएगा. रमज़ान के ख़त्म होने के बाद मनाए जाने वाले त्योहार को ईद-उल-फितर कहा जाता है. इस त्योहार के मौके पर बड़ी रौनक़ दिखाई देती है.सभी मस्जिदों को सजाया जाता है, मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनते हैं, घरों में बेहतरीन पकवान बनाए जाते हैं, अपने से छोटे लोगों को ईदी दी जाती है और सबसे बड़ी बात यह कि ईद के मौके पर सारी शिकायतें और नराजगियां भुला कर एक-दूसरे से गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है. हालांकि, इस साल भी कोविड लॉकडाउन के चलते सभी लोग अपने-अपने घरों में ही ईद मनाएंगे.

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, रमज़ान के महीने के बाद 10वें शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है. ईद कब होगी जाएगी यह चांद के निकलने पर निर्भर करता है. ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपने अपने घरों में मीठे पकवान जैसे खासतौर पर सेंवईं बनाते हैं. सभी लोग आपस में गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हुए सभी शिकवे दूर करते हैं. इस्लाम धर्म का यह ईद का त्योहार अमन और भाईचारे का संदेश देता है, लेकिन इस बार भी कोरोना महामारी के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए सब जगह ईद मनाई जाएगी. कोरोना की ही वजह से इस बार भी लोग आपस में नहीं मिल पाएंगे और अपने-अपने घरों में ही ईद की खुशियां मनाएंगे.

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ईद के दिन सभी लोग सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर नए कपड़े पहनते हैं और ईद की नमाज़ पढ़ते हैं. इस दिन पढ़े जाने वाली पहली नमाज़ को सलात अल फज़्र कहते हैं. ईद से पहले रमज़ानों के महीने में ही हर मुस्लमान के लिए ज़क़ात देना फर्ज़ यानी अनिवार्य है. जकात के तहत हर मुसलमान को पौने दो किलो अनाज या उसकी कीमत ग़रीबों को दान में देना होता है.

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दीवाली के बाद ईद देश का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है जिसमें सैकड़ों करोड़ की खरीददारी की जाती है, जो कि इस बार भी बाजार बंद होने के कारण बिल्कुल भी नहीं हो पाई है. इस बार न बाज़ारों में ईद की रौनक़ दिखेगी, न ही लोग मस्जिदों में नमाज़ पढ़ेंगे, न किसी के घर जाएंगे, न किसी से हाथ मिलाएंगे और न ही गले मिलेंगे. इस बार भी सभी लोग अपने घरों में अकेले या सिर्फ अपने परिवार के साथ ईद मनाएंगे. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सभी से अपील करते हुए कहा है कि ईद की खरीदारी के बजट की आधी रकम लॉकडाउन से बेरोज़गार हुए लोगों की मदद पर खर्च किए जाएं.

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