भगवान गणेश को क्यों पसंद है दूर्वा? गणेश चतुर्थी 2021 पर जानें गणपति को प्रसन्न करने के उपाय

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 8th Sep 2021, 1:52 PM IST
  • विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा  के आशीर्वाद से विशेष लाभ मिलता है. लेकिन इसके लिए जरूरी है भगवान को प्रसन्न करना. आज हम आपको बता रहे हैं श्री गणेश की अतिप्रिय चीजों के बारे में, जिसका इस्तेमाल में आप पूजा में करके उन्हें प्रसन्न कर भगवान का आशीर्वाद पा सकते हैं.
भगवान गणेश को क्यों पसंद है दूर्वा घास. फोटो साभार-लाइव हिन्दुस्तान

भाद्रमास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. इस बार गणेश चतुर्थी 10 सिंतबर 2021 को होगी.पूरे 10 दिनो तक घर और मंदिर में भगवान गणेश विराजमान होंगे और गणपति बप्पा मोरिया की गूंज हर ओर सुनाई देगी. भगवान के आगमन की तैयारी लगभग शुरू हो चुकी है. घर और मंदिर पूरी तरह से सज चुके हैं अब बस भगवान की प्रतिमा को लाने का इंतजार है. 

गणेश भगवान की पूजा हर देवी देवता से पहले की जाती है. उन्हें शुभता का कारक माना जाता है. इसलिए हर शुभ काम में सबसे पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है. ऐसे में गणेश चतुर्थी पर ये और भी खास हो जाता है कि उनकी विषेश पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद पाया जाए. गणेश भगवान खुश होकर अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते है. तो चलिए आपको बताते हैं भगवान को उनकी प्रिय चीजों से प्रसन्न करने के उपाय.

Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी को नहीं करना चाहिए चंद्र दर्शन, जानें गणपति की पूजा विधि

भगवान गणेश को पसंद है दूर्वा घास- हिंदू धर्म में प्रत्येक देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा के लिए अलग अलग सामग्रियां होती हैं. भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास जरूर चढ़ाई जाती है. इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और आपको मनचाहा वरदान मिलता है.

दूर्वा चढ़ाने ने नियम-भगवान गणेश की पूजा करते समय दूर्वा का जोड़ा बनाकर चढ़ाया जाता है. मान्यता है कि दूर्वा घास के 11 जोड़ों को भगवान गणेश को चढ़ाना चाहिए. दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के 11 मंत्रों का जाप जरूर करें.वहीं दूर्वा घास को साफ सुधरी जगह से तोड़ना चाहिए गंदी मैली जगहों से पूजा के लिए कभी दूर्वा ना तोड़ें. कुछ लोग घर के गमले में भी पूजा के लिए दूर्वा लगाते हैं. ये आसानी से कहीं भी लग जाते हैं.

दूर्वा चढ़ाने के पीछे की कथा- पौराणिक कथा के अनुसार ,अनलासुर नाम के एक दैत्य का आंतक चारों तरफ फैला था. इसके आंतक से सारे देवी-देवता परेशान थे. कोई भी देवता इस राक्षस को मार नहीं पाए. तब सभी देवता अनलासुर के आंतक से परेशान होकर भगवान गणेश की शरण में गए.फिर श्री गणेश ने राक्षस को निगल लिया लेकिन अनलासुर को निगलने के बाद भगवान के पेट में तेज जलन होने लगी. उनकी इस जलन को शांत करने के लिए श्रषि मुनियों ने उन्हें दूर्वा घास खाने को दी. इसे खाते ही भगवान गणेश के पेट की जलन शांत हो गई थी. तब से भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा चढ़ाया जाना लगा.

Ganesh Chaturthi: गणपति की स्थापना करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन ये है शुभ मुहूर्त

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें