छठ महापर्व जितना ही कठिन होता है जितिया का व्रत, जानिए पूजा विधि

Smart News Team, Last updated: Fri, 10th Sep 2021, 3:10 PM IST
  • जितिया का व्रत हिंदू धर्म की कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. ये व्रत संतान प्राप्ति और उनकी लंबी आयु के लिए रखी जाती है. जितिया व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ही ज्यादा महत्व होता है.
जितिया व्रत 2021

हिंदू धर्म में महिलाएं संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु और सुखमय जीवन के लिए जितिया व्रत रखती हैं. हर साल आश्वन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जितिया का पर्व मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं अपनी संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, और सुखमय जीवन, लंबी आयु की कामना करती हैं. खासतौर से जितिया का पर्व बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पिश्चिम बंगाल में मनाया जाता है. सभी व्रतों में से सबसे कठिन इस व्रत को माना जाता है, क्योंकि ये तीन दिनों तक चलता है. इस बार 28 से लेकर 30 सितंबर तक जितिया का पर्व मनाया जाएगा. सप्तमी तिथि के दिन जितिया व्रत में नहाए खाए, अष्टमी के दिन व्रत और नवमीं को पारण किया जाता है.

जितिया व्रत का धार्मिक महत्व क्या है

इस व्रत का धार्मिक महत्व महाभारत से जुड़ा हुआ बताया गया है. ऐसी मान्यता है कि श्री कृष्ण ने अपने सारे पुण्य कर्मं को उत्तरा के गर्भ में पल रहे पांडव पुत्र को बचाने के लिए लगा दिया था. जिससे वो पुनर्जीवित हुआ था, उसी दौरान से कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं, और अपने संतान की लंबी आयु के लिए कामना करती हैं.  ऐसी मान्यता है कि भगवान इस व्रत से प्रसन्न होकर स्त्रियों की संतान की रक्षा करते हैं.

ये है जितिया व्रत कथा

ऐसी मान्यता है कि जो लोग जितिया व्रत की कथा पढ़ते हैं, पढ़ने मात्र से ही संतान को लंबी आयु का वरदान मिल जाता है. पौराणिक कथाओं में वर्णन किया गया है कि गुरुड़ और लोमडड़ी एक पेड़ पर रहते थे. कुछ महिलाओं को दोनों ने व्रत और पूजा करते देखा, तो उनका मन भी जितिया व्रत करने का कर गया. भगवान श्री जीऊतवाहन की दोनों ने पूजा की और व्रत करने का संकल्प लिया. लेकिन दोनों को जिस दिन व्रत रखना था, गांव के एक बड़े व्यपारी की उस दिन मृत्यु हो गई. लोमड़ी उसके शव को देख अपनी भूख पर काबू नहीं कर पाया. उसने व्रत को चुपके से तोड़ दिया और भोजन किया. तो वहीं दूसरी ओर इस व्रत का चील ने बखूबी पालन किया, और समर्पण के साथ पूरा किया. इसका परिणाम ये हुआ की लोमड़ी से अगले जन्म में जो भी बच्चे पैदा हुए वो मर जाते थे, तो वहीं एक-एक करके चील को सात लड़के हुए.

 

 

 

 

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