स्वतंत्रता दिवस पर जानें तिरंगा का इतिहास, क्यों है आजादी के जश्न का आकर्षण

Smart News Team, Last updated: Sun, 15th Aug 2021, 9:19 AM IST
आज यानी 15 अगस्त को हमारा देश आजादी का जश्न मना रहा है. 15 अगस्त 1947 में भारतवासियों को अंग्रेजों की गुलामी से छुटकारा मिला था. हालांकि ये आजादी इतनी आसान नहीं थी, इसके लिए कई जाबांज ने अपनी कुर्बानी दी.
तिरंगा का इतिहास

1947 में 15 अगस्त के दिन हमारे देश को आजादी मिली थी, इसी दिन से इसे स्वतंत्रता दिवस के रुप में सेलिब्रेट किया जाता है. 15 अगस्त के दिन जो सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनता है वो है अपना राष्ट्रीय ध्वज. बात लाल किले की हो, या स्कूलों और सरकारी संस्थानों हर जगह पर तिरंगे झंडे को लोग बेहद ही शान के साथ फहराते हैं. तिरंगे पर हर कोई किसी ना किसी रूप में प्यार लूटाता हुआ नजर आता है. स्वतंत्रता दिवस के दिन कुछ लोग तीन रंगों का कपड़ा पहनते हैं, तो कई शरीर पर अपने टैटू बनवा लेता है, तो वहीं कोई तीन कलर का मेकअप करवाता है. हालांकि इस तिरंगे के पीछे का इतिहास बहुत कम लोग ही जानते हैं.

 पहला झंडा- 7 अगस्त 1906 में कलक्ता के पारसी बगान स्कवॉयर में पहला भारतीय झंडा फहराया गया था. इस झंडे में लाल, पीले और हरे रंग का इस्तेमाल हुआ था. बीच की पट्टी पर इस झंडे में वंदेमातरम लिखा हुआ था. तो वहीं नीचे की पट्टी पर सूर्य और चांद बना हुआ था.

दूसरा झंडा- 1907 में मैडम कामा और निर्वासित क्रांतिकारियों के संगठन ने भारत का दूसरा झंडा पेरिस में पहराया था. वैसे पहले झंडे से ये झंडा इतना भी अलग नहीं था. इस झंडे में हरे, पीले और ऑरेंज रंग की पट्टियां थी. बीच में इस झंडे पर भी वंदेमातरम लिखा हुआ था, और नीचे वाली पट्टी पर सूर्य और चांद बना हुआ था.

तीसरा झंडा- 1917 में तीसरे झंडे को डॉ एनी वेसेंट और लोकमान्य तिलक ने होम रूल मूवमेंट के दौरान फहराया था. तीसरे झंडे में ऊपर की तरफ एक यूनियन जैक बना हुआ था. इतना ही नहीं इस झंडे में बिग डिपर या सप्तर्षि नक्षत्र और अर्धचंद्र चंद्र और सितारे  शामिल थे.

चौथा झंडा- लेकख और भूमौतिकीविद् पिंगली वेंकैया ने देश की एकजुटता के लिए 1916 में एक झंडा डिजाइन किया था. वैसे उन्होंने इसके लिए गांधी जी से अनुमति भी ली थी. गांधी जी ने उन्हें सलाह दिया था कि वो अपने झंडे में चरखा को शामल करें. 1921 में गांधी जी ने इस झंडे को फहराया. इस झंडे के अंदर सबसे ऊपर सफेद, बीच में हरा और नीचे लाल रंग था.

पांचवां झंडा- भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में 1931 के दौरीन एतिहासिक बदलाव हुए. भारत के तिरंगे को कांग्रेस कमेटी के एक बैठक के दौरान हुए प्रस्ताव में मंजूरी मिली. इस तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया रंग, बीच में सफेद और नीचे हरा कलर था. तो वहीं नीले रंग का चरखा सफेजद रंग की पट्टी पर बना था.

छठा झंडा- संविधान सभा ने आजाद भारत के लिए पांचवे झंडे को ही स्वीकार किया था. हालांकि चरखे को हटाकर बाद में इसमें अशोक के धर्म चक्र को शामिल कर लिया गया. बाद में 1947 में यही झंडा राष्ट्रीय ध्वज बन गया.

 

 

 

 

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