पटना के सदर अस्पताल में सुविधाओं की कमी, प्रसव कराने आ रही महिलाओं को परेशानी

Smart News Team, Last updated: Wed, 30th Dec 2020, 3:20 PM IST
  • पटना के सदर अस्पताल में प्रसूति विभाग तीन महिला डॉक्टरों के भरोसे हैं. जिनमें से एक अधिकांश अवकाश पर ही रहती है. जिस कारण गरीब परिवार की महिलाओं को मजबूरन निजी अस्पतालों में महंगा ईलाज करवाना पड़ रहा है 
राजधानी के सदर अस्पताल में सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है

पटना. राजधानी के सदर अस्पताल में सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पटना सिटी के श्री गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह अस्त व्यस्त है. यहां डॉक्टरों की भी कमी है. इस वजह से मरीज यहां से पलायन करने में ही बेहतरी समझ रहे हैं. गौर हो कि यहां सबसे बुरा हाल प्रसूती विभाग का है, यहां पांच की जगह तीन महिला डॉक्टरों से ही काम चलाया जा रहा है. मरीजों और उनके स्वजनों की ओर से दोपहर के समय यहां एक भी डॉक्टर नहीं होने की शिकायत अस्पताल प्रशासन को दी गई है.

गौर हो कि यहां तैनात पांच महिला डॉक्टरों में से एक उपाधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रही है, जो जनवरी में रिटायर्ड हो जाएंगी. एक अन्य महिला डॉक्टर राज्य स्वास्थ्य समिति में लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर हैं. बाकी जो तीन महिला डॉक्टर हैं उनमें से एक अधिकांश समय पर अवकाश पर ही रहती है.

उल्लेखनीय है कि सदर अस्पताल में औसतन एक माह में दस गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन होते हैं और सामान्य प्रसव करीब 100 गर्भवतियों का हो पाता है. ऑपरेशन एवं सामान्य प्रसूति एक माह में औसतन 300 से अधिक होनी चाहिए. इस पूरे मामले के संबंध में डॉ. पशुपति प्रसाद का कहना है कि गायनी में तीन डॉक्टर हैं और ऐसे में ओटीपी तीनों शिफ्ट में चलाना मुश्किल है. सामान्य प्रसूति एवं ऑपरेशन की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया है.

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गौर हो कि सदर अस्पताल में कम स्टाफ के चलते गरीब परिवार की महिलाएं परेशान हो रही है. मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल में महंगा ईलाज करवाना पड़ रहा है. सदर अस्पताल में सामान्य प्रसूति एवं ऑपरेशन की संख्या भी कम हो गई है. जिसका फायदा यहां निजी अस्पतालों के सक्रिय दलाल उठा रहे हैं. इस संबंध में अस्पताल सुधार समिति के महासचिव बलराम चौधरी ने बताया कि निजी अस्पताल के सक्रिय दलाल गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में ले जाते हैं और उनसे अधिक भुगतान लेकर वहां इन महिलाओं का ऑपरेशन किया जाता है.

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