Navratri 2021: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की करें पूजा, जानें आरती-मंत्र

Anuradha Raj, Last updated: Fri, 24th Sep 2021, 6:05 PM IST
  • हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि के पहले दिन घट की स्थापना की जाती है, और अखंड दीप जलाई जाती है. नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है.
Navratri 2021

नवरात्रि सनातन धर्म के मुख्य पर्वों में से एक माना जाता है. इस बार 7 अक्टूबर से नवरात्रि आरंभ हो रहा है, जो 15 नवंबर तक चलने वाला है. नवरात्रि का शुभारंभ घटस्थापना के साथ होता है. इस दिन भक्त अखंड ज्योत जलाते हैं. , और माता शैलपुत्री की पूजा करते हैं. मां दुर्गा के पहले स्वरूप को नवरात्रि का पहला दिन समर्पित होता है. पौरामिक कथाओं पर गौर करें तो पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में माता शैलपुत्री का जन्म हुआ था. इसी कारण से उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. बहुत ही ज्यादा शुभ मानी जाती हैं माता शैलपुत्री. माता पार्वती और उमा के नां से भी शैलपुत्री को जाना जाता है. वृषभ पर माता शैलपुत्री विराजमान रहती हैं. शैलपुत्री को संपूर्ण हिमालय पर्वत समर्पित हैं. शैलपुत्री को अत्यंत सौम्य स्वभाव का माना जाता है, वो अपने भक्तों को वरदान देती हैं.

 

मां शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।

शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।

पार्वती तू उमा कहलावे। ‌ जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी। ‌

उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।

घी का सुंदर दीप जला‌ के। गोला गरी का भोग लगा के।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।

मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

मां शैलपुत्री मंत्र

वन्दे वाच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

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