51 शक्तिपीठों में से एक है पटन देवी मंदिर, इन्हीं के नाम पर शहर का नाम पड़ा पटना

Smart News Team, Last updated: Wed, 14th Jul 2021, 10:48 AM IST
  • बिहार की राजधानी पटना में स्थित बड़ी देवी पटन मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. कहा जाता है कि देवी पटनेश्वरी के नाम के आधार पर ही शहर का नाम पटना पड़ा.
जब घटना की जानकारी भगवान शिव को हुई तो उन्होंने देवी सती के मृत शरीर को हाथों में लेकर घमासान तांडव किया. (Pic Credit -epuja.co.in)

बिहार की राजधानी पटना में स्थित बड़ी देवी पटन मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. कहा जाता है कि देवी पटनेश्वरी के नाम के आधार पर ही शहर का नाम पटना पड़ा. पौराणिक कथाओं के मुताबिक माता सती के पिता दक्ष प्रजापति एक यज्ञ करवा रहे थे. इस दौरन राजा दक्ष प्रजापति ने अपनी बेटी सती के पति यानी भगवान शिव का अपमान किया, जिससे वह काफी नाराज हो गई थीं. गुस्से में आकर सती ने आग में कूदकर खुद का जीवन खत्म करने की कोशिश भी की.

वहीं जब घटना की जानकारी भगवान शिव को हुई तो उन्होंने देवी सती के मृत शरीर को हाथों में लेकर घमासान तांडव किया. उनके इस तांडव से पूरा संसार हिल गया था, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपना चक्र चलाया. भगवान विष्णु के चक्र से सती माता के शरीर के 51 टुकड़े हो गए थे. इसमें से उनकी दाहिनी जांघ पटना के पास गिरी, जिससे उस जगह को अब शक्तिपीठ पटन देवी मंदिर के रूप में भी जाना जाता है.

बिहार की राजधानी पटना में स्थित बड़ी देवी पटन मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. (Pic Credit -epuja.co.in)

पटन देवी मंदिर के दो स्वरूम हैं, इनमें से एक छोटी पटन देवी मंदिर है तो दूसरी बड़ी पटन देवी मंदिर. कहा जाता है कि यह मंदिर पटना शहर की रक्षा करता है, जिससे इस मंदिर को भगवती पटनेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है. यहां महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की मूर्तियां भी स्थापित हैं. नवरात्रों के दिनों में मंदिर के आसपास अलग ही रौनक देखने को मिलती है. दूर-दूर से लोग पटन देवी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. कहा जाता है कि जो सच्ची श्रद्धा से यहां अपनी मुराद लेकर आता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. इसके साथ ही नए शादी-शुदा जोड़े के लिए भी मंदिर काफी खास माना जाता है.

इस मंदिर में देवी को रोजाना दिन में कच्ची और रात में पक्की भोज्य सामग्री का भोग लगाया जाता है. एक मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति अर्धरात्रि के समय पूजा के बाद पट खुलते ही 2:30 बजे आरती होने के बाद मां के दर्शन करता है, उसे साक्षात भगवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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