पटना: कोरोना महामारी के कारण इस साल गया में नहीं आयोजित होगा पितृपक्ष मेला

Smart News Team, Last updated: 19/08/2020 08:42 AM IST
  • कोरोना महामारी के कारण इस साल गया में पितृपक्ष मेला नहीं आयोजित होगा. पटना, गया और बिहार के कई इलाकों में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए बिहार में लॉकडाउन की स्थिति है. ऐसे में पितृपक्ष मेला भी रद्द कर दिया गया है ताकि लॉकडाउन के नियमों का पालन किया जा सके. 
पटना: कोरोना महामारी के कारण इस साल गया में नहीं आयोजित होगा पितृपक्ष मेला

पटना. गया में हर साल बड़े पैमाने पर पितृपक्ष मेला आयोजित होता है. हालांकि कोरोना माहामारी के चलते इस साल ये मेला आयोजित नहीं किया जाएगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निर्णय लिया है कि कोरोना के फैलते संक्रमण के कारण इस साल पितृपक्ष मेला आयोजित ना किया जाए. हर साल राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग गया में इस मेले का आयोजन करता है जहां दूर-दूर से लोग आते हैं. इस साल कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए किसी भी तरह भीड़ ना जमा करने की कोशिश की जा रही है. 

मंगलवार को विभाग ने जनहित में पितृपक्ष मेला स्थगित रखने की बात कही. इस साल ये मेला दो सितंबर से शुरू होना था. हालांकि राज्य में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के कारण राज्य सरकार ने 6 सितंबर तक लॉकडाउन की घोषणा की है. ऐसे में मेला भी रद्द किया गया है ताकि लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए एक जगह पर भीड़ ना जमा की जाए. मेला रद्द करने की घोषणा भूमि राजस्व विभाग ने एक पत्र के जरिए की है.

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भूमि राजस्व विभाग ने अपनी चिट्ठी में भारत सरकार के गृह मंत्रालय और बिहार सरकार के गृह विभाग के लॉकडाउन 6 सितंबर तक बढ़ाए जाने के आदेश का जिक्र किया है. पत्र में लिखा है भारत और राज्य सरकारों के आदेश के आलोक में यह निर्णय लिया गया है. कोविड-19 के कारण पितृपक्ष मेला में आने वाले पिंडदानियों द्वारा सामाजिक दूरी के अनुपालन में होने वाली कठिनाइयों और संभावित संक्रमण को देखते हुए जनहित में पितृपक्ष मेला 2020 को स्थगित किया गया है.

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गौरतलब हो की गया जी में हर साल इस मेले का आयोजन होता है जिसमें छह लाख से ज्यादा पिंडदानी पितरों को मोक्ष दिलाने आते हैं. ये मेला एक महीने तक चलता है. पंडा जी का एक बड़ा वर्ग पूरे साल पिंडदानियों का इंतजार करता है. बड़ी संख्या में लोग एक महीने तक यहां रहकर पिंडदान करते हैं. ऐेसे में यहां व्यापार भी बढ़ता है और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता है. लेकिन, इस साल मेला आयोजित नहीं किए जाने से हजारों लोगों का रोजगार छिन जाएगा.

 

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