Pitru Paksha 2021: सोमवार 20 सितंबर को पितृपक्ष का पहला श्राद्ध, पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए करें ये काम

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 15th Sep 2021, 2:10 PM IST
  • हिंदू धर्म में श्राद्ध का खास महत्व होता है. हर साल लोग पूर्वजों का श्राद्ध कर उनका आशीर्वाद पाते हैं. पितृ पक्ष पर पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है. भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू हो कर अमावस्या तक यानी पूरे 16 दिन तक श्राद्ध यानी पितृ पक्ष होता है.
पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध विधि. फोटो साभार-हिन्दुस्तान

पितृ पक्ष पूर्वजों का श्राद्ध कर उन्हें याद करने का दिन होता है. हिंदू धर्म में श्राद्ध का खास महत्व होता है. मान्यता है कि 16 दिन तक चलने वाले पितृ पक्ष में पितरों को याद कर उनका श्राद्ध करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और  उनका आशीर्वाद मिलता है. हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से आश्विन मास की अमावस्या यानी 16 दिनों तक श्राद्ध पर्व होता है. इस बार पितृ पक्ष यानी श्राद्ध 20 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगा. लेकिन पित- पक्ष का पहला और अंतिम श्राद्ध खास माना जाता है.

श्राद्ध की 16 तिथियां होती हैं, पूर्णिमा, प्रतिपदा, द्वि‍तीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या. इनमें से जो भी एक तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु होती है चाहे वह कृष्ण पक्ष की तिथि हो या शुक्ल पक्ष की. श्राद्ध में जब यह तिथि आती है तो जिस तिथि में व्यक्ति की मृत्यु हुई है उस तिथि में उसका श्राद्ध करने का विधान है.

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पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध- ऐसे में जिनकी मृत्यु पूर्णिमा के दिन हुई थी, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष के पहले दिन यानी 20 सितंबर को किया जाएगा. इनका श्राद्ध केवल भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा अथवा आश्विन कृष्ण अमावस्या को किया जाता है. इसे प्रोष्ठपदी पूर्णिमा भी कहते हैं.

पितृ पक्ष में पितरों के लिए अपनी इच्छा और शक्तिनुसार दान-पुण्य करने का भी विधान है. दान में गौदान से लेकर चांदी, घी, फल, वस्त्र, तिल, नमक, गुड़ और स्वर्ण जैसी चीजों का दान दिया जाता है. दान देने से पहले संकल्प करना होता है इसके बाद संकल्प किए गए दान को किसी पुरोहित या ब्राह्मण को दिया जाता है.

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