Sharad Purnima Kojagari: जानें क्या होता कोजगारी, शरद पूर्णिमा के दिन सीता ने माता ने निहारा था चांद

Priya Gupta, Last updated: Mon, 18th Oct 2021, 9:46 AM IST
  • बिहार में कोजगारी का बहुत महत्व है. इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं और संपूर्ण आभा के साथ आसमान में खिलता है
Sharad Purnima Kojagari

19 अक्टूबर की रात कोजगारी की रात के रूप में मनाया जाता है. बिहार में कोजगारी का बहुत महत्व है. इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं और संपूर्ण आभा के साथ आसमान में खिलता है. चंद्रमा का प्रकाश सिर्फ उजाला ही नहीं भर देता है, बल्कि यह सृष्टि में ब्रह्मं ज्ञान का प्रतीक है. इस धवल चांदनी के साथ देवी लक्ष्मी का आशीष भी जुड़ा है. इसलिए कोजगारी की रात ऐश्वर्य और आरोग्य की रात होती है.

बिहार में कोजगारी की रात को रात की रानी कहा जाता है. कोजागरी को देश भर में शरद पूर्णिमा कहते हैं. ऐसे में प्रेम की रात से अगर इसे जोड़ा जाए तो श्रीकृष्ण और उनकी सलीला नजर आती है. दरअसल श्रीकृष्ण शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों के संग महारासलीला करते थे. बात अगर बिहार की करें तो यह प्रेम मिथिलांचल से जुड़ा है. जहां की देवी सीता माता हैं, जो खुद लक्ष्मी स्वरूप हैं.

Somvar Vrat: कैसे करें सोमवार व्रत का उद्यापन, ये है आसान विधि, नियम व सामग्री

देवी सीता ने पुष्पवाटिका में श्रीराम को देखकर जब व्याकुल हो गईं तो रात में उन्होंने चंद्र देव से ही प्रार्थना करते हुए कहा, हे चंद्र, अपने चंद्र मौली भगवान शिव और उनकी पत्नी गिरिजा भवानी तक मेरी ये विनती पहुंचाओ. जिस रात देवी सीता ये प्रार्थना कर रही थीं, वह कोजागरी यानी शरद पूर्णिमा की ही रात थी. इसी तरह श्रीराम भी चंद्रमा को देखते हुए सीता जी को याद करते हैं और कई-कई उपमाएं देते हैं. इसका वर्णन तुलसीदास जी ने मानस में किया है.

पूर्व दिशा में सुंदर चन्द्रमा उदय हुआ. श्री रामचन्द्रजी ने उसे सीता के मुख के समान देखकर सुख पाया. फिर मन में विचार किया कि यह चन्द्रमा सीताजी के मुख के समान नहीं है. इस प्रकार चन्द्रमा के बहाने सीताजी के मुख की छबि का वर्णन करके, बड़ी रात हो गई जान, वे गुरुजी के पास चले जाते हैं.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें