मंगलवार के दिन करें संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ, हर समस्या से मिलेगी मुक्ति

Pallawi Kumari, Last updated: Tue, 23rd Nov 2021, 8:08 AM IST
  • मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है.जो भक्त विधि विधान से भगवान की पूजा अराधना करता है, प्रभु हनुमान उसकी हर मनोकमना तुरंत पूरी करते हैं. मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करते समय संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करना चाहिए. किसी भी ससस्या के लिए ये पाठ काफी प्रभावकारी माना गया है.
मंगलवाप हनुमान पूजा में जरूर पढ़े ये पाठ

हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है. मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि ये दिन भगवान को प्रिय होता है और इस दिन बजरंगबली की भक्ति भाव से पूजा अराधना करने पर उनका आशीर्वाद मिलता है. प्रभन अपने भक्त की हर पीड़ा हर संकट का निवारण करते हैं. इसलिए उन्हें संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर मंगलवार के दिन आप पूजा के दौरान बजरंगबली के संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करेंगे तो आपको हर संकट से मुक्ति मिलेगी. 

हनुमानाष्टक पाठ-

बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो ।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ॥

देवन आन करि बिनती तब, छांड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,जात महाप्रभु पंथ निहारो ।

चौंकि महा मुनि शाप दिया तब,चाहिय कौन बिचार बिचारो ॥

के द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,सो तुम दास के शोक निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥2॥

Surya Grahan 2021: 4 दिसंबर को लगेगा साल का आखिर सूर्य ग्रहण, इन राशियों में मचएगा हाहाकार

अंगद के संग लेन गये सिय,खोज कपीस यह बैन उचारो ।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु,बिना सुधि लाय इहाँ पगु धारो ॥

हेरि थके तट सिंधु सबै तब,लाय सिया-सुधि प्राण उबारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥3॥

रावन त्रास दई सिय को सब,राक्षसि सों कहि शोक निवारो ।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु,जाय महा रजनीचर मारो ॥

चाहत सीय अशोक सों आगि सु,दै प्रभु मुद्रिका शोक निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥4॥

 

बाण लग्यो उर लछिमन के तब,प्राण तजे सुत रावण मारो ।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत,तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ॥

आनि सजीवन हाथ दई तब,लछिमन के तुम प्राण उबारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥5॥

रावण युद्ध अजान कियो तब,नाग कि फांस सबै सिर डारो ।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,मोह भयोयह संकट भारो ॥

आनि खगेस तबै हनुमान जु,बंधन काटि सुत्रास निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥6॥

 

बंधु समेत जबै अहिरावन,लै रघुनाथ पाताल सिधारो ।

देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि,देउ सबै मिति मंत्र बिचारो ॥

जाय सहाय भयो तब ही,अहिरावण सैन्य समेत सँहारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥7॥

काज किये बड़ देवन के तुम,वीर महाप्रभु देखि बिचारो ।

कौन सो संकट मोर गरीब को,जो तुमसों नहिं जात है टारो ॥

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,जो कछु संकट होय हमारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥8॥॥

सूर्यग्रहण के समय बंद हो जाते हैं मंदिर के कपाट, जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें