मौर्या लोक में इस बार दुर्गा पूजा का मेला नहीं, खोमचा वालों का धंधा हुआ मंदा

Smart News Team, Last updated: 24/10/2020 10:27 PM IST
पटना. दुर्गा पूजा के मेले के दौरान मौर्या लोक हब माना जाता है. यहां डाक बंगला चौराहे पर काफी बड़ा मेला लगता था लेकिन कोरोना का असर यहां रोजी कमाने वालों पर साफ दिख रहा है. ठेला लगाने वालों की त्योहारों को दौरान 15 दिन पहले से ही खास तैयारी होती है लेकिन इस बार कोरोना के चलते लॉकडाउन में इनका धंधा मंदा है और अब इस फेस्टिवल सीजन में इस बार इन्हें कमाई करने का मौका भी नहीं मिलेगा. इस बार पूजा पंडाल के बाहर मेले पर रोक है. मौर्या लोक में दुर्गा पूजा का मेला नहीं लगेगा. मेले में खोमचा लगाने वालों का कहना है कि उनके पास 50 हजार तक लोग आते थे - चार दिन के मेले में 20 से 25 हजार की कमाई हो जाती थी लेकिन अब सब चौपट है. मूर्तिकारों पर भी इसका असर हुआ है. ठेले वाले और खोमचें वालों का धंधा पूरी तरह कोरोना के चौपट हो चुका है. डाक बंगला चौराहे पर जो दुर्गा मां की प्रतिमा बैठती थी. इस बार वो भी नजर नहीं आ रही है. ठेला लगाने वाले राहुल चाट के राहुल से बात की गई तो उसने कहा कि पिछले 16 साल से यहां ठेला लगा रहे हैं. दुर्गा पूजा का त्योहार उनके लिए बोनस के रूम में आता था लेकिन 16 साल में इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि उनका धंधा चौपट है. उन्होंने बताया कि जब मेला लगता था तो हर दिन उनके पास काफी भीड़ रहता था और खाना खाने तक की फुर्सत नहीं मिलती थी. अब कोरोना के कारण तो नार्मल दिनों की कमाई भी पहले की तरह नहीं हो रही. उनका कहना है कि उनकी अब छठ पूजा के त्योहार से उम्मीद है.                                                                                                            राजकुमार ने बताया कि उन्होंने 1989 में सबसे पहले यहां ठेला लगाया था लेकिन ऐसा पहली बार है कि उनके पास कोई काम ही नहीं है. लोग बाजार में नहीं है. पंडाल नहीं है इसलिए उनकी कोई तैयारी नहीं है. भेल पुरी का ठेला लगाने वाले मुकेश कुमार ने कहा कि पहले मेले में रोजाना तीन से चार हजार पानी पूरी रोजाना बिक जाती थी लेकिन अब 1000 पानी पुरी भी बिक नहीं रहे. सभी का यही कहना है कि लोग आ रहे हैं लेकिन कोरोना के चलते नहीं खा रहे हैं. उनकी कमाई का यही रोजगार था लेकिन इस बार कोरोना के कारण धंधा बुरी तरह खराब हो गया है.

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