महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ में दी गई भू समाधि, जानिए पर्दे में क्यों दी जाती है भू समाधि?

Nawab Ali, Last updated: Wed, 22nd Sep 2021, 6:57 PM IST
  • अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की अंतिम यात्रा जुलूस के रूप में आज सुबह बागंबरी गद्दी मठ आश्रम से शुरू हुई. महंत नरेंद्र गिरी के पार्थिव शरीर को एक खुले वाहन में रखा गया जिसे फूलों से सजाया गया. उन्हें कथित सुसाइड नोट में लिखी अंतिम इच्छा के अनुसार बाघंबरी मठ में भू समाधि दी गई.
महंत नरेंद्र गिरी को बाघंबरी मठ में दी गई भू समाधि.

प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी को बाघंबरी मठ में भू समाधि दी गई. उनकी अंतिम यात्रा जुलूस के रूप में आज सुबह बागंबरी गद्दी मठ आश्रम से शुरू हुई. महंत नरेंद्र गिरी के पार्थिव शरीर को एक खुले वाहन में रखा गया जिसे फूलों से सजाया गया. नरेंद्र गिरी की शव यात्रा का जुलूस गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के पवित्र संगम संगम तक ले जाया गया. जिसके बाद उनका शव पंचायती अखाड़ा निरंजनी के पदाधिकारियों को सौंपा गया.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरी की अंतिम यात्रा में देशभर से बड़ी तादाद में पहुंचे श्रधालुओं ने हिस्सा लिया है. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी महंत की अंतिम यात्रा में पहुंचे. महंत नरेंद्र गिरी की अंतिम यात्रा जुलूस बागंबरी गद्दी मठ आश्रम से शुरू होकर गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के पवित्र संगम तक ले जाया गया. जहां पर मठ पहुंचने से पहले उनके शरीर को गंगा के पवित्र जल में डुबाया गया. वापस मठ लौटते वक्त हनुमान मंदिर पर कुछ देर यात्रा को रोका यहां महंत नरेंद्र गिरी अपनी अंतिम सांस तक महंत के रूप में काम किया है. महंत नरेंद्र गिरी के कथित सुसाइड नोट के आधार उनकी इच्छा के मुताबिक मठ के बगीचे में नींबू के पेड़ के समीप उन्हें भू समाधि दी गई.

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महंत नरेंद्र गिरी एक अंतिम दर्शन के लिए देशभर के तमाम साधु-संत प्रयागराज पहुंचे साथ ही 13 प्राचीन अखाड़ों के विभिन्न महामंडलेश्वर सहित भिक्षु और संन्यासी शामिल हुए हैं. प्रयागराज में ज्यादा भीड़ के कारण कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों को बंद रखा गया. पंचायती अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने बताया है कि संत को दो रूपों में समाधि दी जाती है या तो जल समाधि या भू समाधि लेकिन नरेंद्र गिरी की अंतिम इच्छा के अनुसार उन्हें भू समाधि दी गई. नरेंद्र गिरी के शरीर को बैठने की मुद्रा में रखा गया जैसे कि वह मध्यस्थता कर रहा हो और रत्न, फूल, शहद, दूध, चीनी, नमक आदि सहित सभी प्रसाद शरीर को अर्पित किए गए.

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पर्दे के पीछे दी गई समाधी

महंत नरेंद्र गिरी को बाघंबरी मठ में ही भू-समाधि दी गई है. इस दौरान उनके शिष्य और तमाम संत मौजूद रहे हैं. महंत की अंतिम विदाई पर सभी लोगों की आंखें नम थी. भू समाधि देने के लिए एक बड़ा चकौर गड्ढा खोदा गया जिसमें एक दीवार को खोदकर छोटा कमरा बनाया गया है. लेकिन समाधि के वक्त इस पूरी प्रिक्रिया को पर्दा लगाकर ढक दिया गया था. सनातन परंपरा के अनुसार संतों को समाधी देते वक्त चारों तरफ से पर्दे से ढक दिया जाता है. पर्दे के पीछे ही महंत नरेंद्र गिरी को भू समाधि दी गई है. समाधि से पहले नरेंद्र गिरी के पार्थिव शरीर का श्रृंगार किया गया तमाम संतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी.

 

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