इलाहाबाद HC बोला- पति से अलग रहते हुए पत्नी कर ले सुसाइड तो नहीं बनता उकसाने का मामला

Prachi Tandon, Last updated: Tue, 21st Sep 2021, 5:33 PM IST
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को सुसाइड के लिए उकसाने के मामले में आरोपी पति को राहत दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी अलग रहती है तो पति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट.

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला की आत्महत्या मामले में सुनवाई करते हुए उसके पति को राहत दी है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पत्नी अपने पति से अलग रहती है और उसी दौरान सुसाइड कर ले तो पति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस नहीं बनता है. हाईकोर्ट का कहना है कि पत्नी अगर प्रताड़ना से परेशान होकर अलग रहने चली जाए तो पति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस नहीं बनता. कोर्ट ने कहा कि जब तक आत्महत्या के लिए उकसाने में एक्टिव रोल साबित ना हो तो इस मामले में केस नहीं बनता.

इलाहाबाद हाईकोर्ट न्यायमूर्ति अजय त्यागी की बेंच ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एक पति को निचली अदालत के फैसले में राहत दी है. निचली अदालत ने पति को आरोपी ठहराया था. पत्नी को सुसाइड के लिए उकसाने के केस में आरोपी जगवीर सिंह उर्फ बंटू ने हाईकोर्ट में अपील की थी. जिसमें उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए और 306 के तहत दोषी पाया गया था. 

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महिला की मौत के बाद शिकायत करने वाले ने साल 2008 के दिसंबर 14 को पीलीभीत के थाना जहानाबाद में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. जिसमें बताया गया था कि उनकी पोती यानी आरोपी बंटू की पत्नी को जहर देकर मारा गया है. शिकायतकर्ता ने रिपोर्ट में लिखा था कि शादी में दिए गए दहेज से युवक और उसका परिवार संतुष्ट नहीं था. वह और दहेज कूी मांग करते थे, जिसके कारण महिला को प्रताड़ित किया जाता था. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी अन्य मामले में कहा था कि आत्महत्या के मामले में उकसाने वाले पर तभी केस बनता है जब उसका एक्टिव रोल हो. 

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