इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, अब इन सिपाहियों को मिलेगा दरोगा का ग्रेड पे

Swati Gautam, Last updated: Sun, 21st Nov 2021, 11:15 AM IST
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में 1998 व उससे पहले से नियुक्त और 16 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सिपाहियों को उनकी ट्रेनिंग अवधि की सेवा को जोड़ते हुए दरोगा को मिलने वाला द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड पे रूपया 4200 ही मिलेगा.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, अब इन सिपाहियों को मिलेगा दरोगा का ग्रेड पे. file photo

प्रयागराज. प्रदेश में 1998 व उससे पहले से नियुक्त और 16 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पुलिसकर्मियों के लिए राहत की खबर है. बता दें कि हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिए हैं कि 1998 के पहले से नौकरी कर रहे सिपाहियों को उनकी ट्रेनिंग अवधि की सेवा को जोड़ते हुए दरोगा को मिलने वाला द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड पे रूपया 4200 देने को लेकर आठ सप्ताह में आदेश पारित किया जाए. जानकारी अनुसार याची सिपाहियों की नियुक्ति वर्ष 1998 में हुई थी लेकिन उन्हें न तो द्वितीय वेतनमान दिया जा रहा था और न ही उनके ट्रेनिंग अवधि को सेवा में जोड़ा जा रहा था.

बता दें कि दरोगा के वेतनमान ग्रेड पे को लेकर यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव ने प्रदेश के लगभग एक दर्जन जिलों से हाईकोर्ट पहुंच कांस्टेबलों रामदत्त शर्मा व कई अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याची सिपाहियों की तरफ से वकील विजय गौतम व अतिप्रिया गौतम ने कोर्ट को तर्क दिए कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों व तत्पश्चात जारी शासनादेशों के बावजूद विभाग उनके प्रशिक्षण अवधि की सेवा को द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान देने के लिए नहीं जोड़ रहा है जबकि वे इसके लिए पूर्ण रूप से हकदार हैं. याचिका में कहा गया था कि लाल बाबू शुक्ला केस में हाईकोर्ट द्वारा प्रतिपादित विधि सिद्धांत के अनुसार याची सिपाहियों की प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ा जाना चाहिए.

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अधिवक्ता गौतम ने कोर्ट में आगे कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश 21 जुलाई 2011 के तहत वे सभी पुलिस कर्मी जिन्होंने विभाग में 16 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उनके प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ते हुए द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड पे रूपया 4200 दरोगा को मिलने वाला वेतनमान दिया जाना चाहिए लेकिन याची सिपाहियों की नियुक्ति वर्ष 1998 में हुई थी लेकिन उन्हें न तो द्वितीय वेतनमान दिया जा रहा था और न ही उनके ट्रेनिंग अवधि को सेवा में जोड़ा जा रहा था.

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