प्रयागराज के सिविल लाइंस रामलीला में नारद मोह का मंचन

ABHINAV AZAD, Last updated: Mon, 4th Oct 2021, 9:54 AM IST
  • इस नारद मोह मंचन के दौरान कलाकारों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया और तालियां बटोरीं. साथ ही मौजूद दर्शकों ने कलाकारों के बेजोड़ अभिनय और सशक्त संवाद को खूब सराहा.
(प्रतीकात्मक फोटो)

प्रयागराज. रविवार के दिन सिविल लाइंस रामलीला में नारद मोह का मंचन किया गया. दरअसल यह शनिवार को ही आयोजित होना था, लेकिन किसी कारणवश स्थगित करना पड़ा. इस प्रसंग में मंच पर नारायण... नारायण... करते हुए देवर्षि नारद आते हैं. देवर्षि नारद हिमालाय पर्वत के मनोरम दृश्य को देखकर तपस्या करने लग जाते हैं.

इस प्रसंग में महाराज इंद्र की सभा में इंट्री होती है. सभा में पधारने के बाद महाराज इंद्र ने पूछा कि धरती पर कंपन क्यों हो रहा है. महाराज इंद्र को बताया जाता है कि देवर्षि नारद हिमालय पर्वत पर घोर तपस्या कर रहे हैं, इस वजह से धरती पर कंपन हो रही है. जिसके बाद सभा में कामदेव को बुलाया जाता है. इस दौरान महाराज इंद्र कहते हैं कि मैं महर्षि नारद की तपस्या भंग कर दूंगा. कामदेव अपनी माया से बसंत ऋतु का सृजन कर देते हैं. जिसके बाद कामदेव नारद पर अपना बाण छोड़ते हैं. कामदेव के नारद पर बाण छोड़ने के बाद सुंदरियां मोहक नृत्य करती हैं. अगले प्रसंग में कामदेव महर्षि नारद से क्षमा मांगते हैं.

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दरअसल, कामदेव को जीतने के बाद महर्षि नारद को अहंकार हो जाता है. जिसके बाद विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचा जाता है. यह स्वयंवर क्षीर सागर में रचा जाता है. क्षीर सागर में विश्व मोहिनी के स्वयंवर प्रसंग के बाद इन्द्र भगवान नारद मुनि को बंदर का रूप दे देते हैं. इस दौरान कलाकारों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया और तालियां बटोरीं. साथ ही मौजूद दर्शकों ने कलाकारों के बेजोड़ अभिनय और सशक्त संवाद को सराहा. बताते चलें कि प्रयागराज के सिविल लाइंस रामलीला में रविवार के दिन नारद मोह का मंचन किया गया.

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