प्रयागराज नगर निगम की पहल, मंदिरों में भगवान पर चढ़ाए गए फूलों से बनेगी अगरबत्ती

Somya Sri, Last updated: Sat, 13th Nov 2021, 11:36 AM IST
  • प्रयागराज नगर निगम की पहल से शहर में मंदिरों और धार्मिक स्थल पर फूल के चढ़ावे के बाद उसे कचड़ा में फेंकने के बजाय नगर निगम को सौंप दिया जाएगा. अब इससे अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाया जाएगा. पहले फूल को सीधे कचरा में डाल दिया जाता है. जिसके बाद कचरे से जैविक खाद बनाई जाती थी. हालांकि फूल और माला धार्मिक आस्था से जुड़ा है. इसलिए इससे अगरबत्ती बनाने का फैसला लिया गया है.
प्रयागराज नगर निगम की पहल, मंदिरों में भगवान पर चढ़ाए गए फूलों से बनेगी अगरबत्ती (फाइल फोटो)

प्रयागराज: अब मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों को कूड़ा में नहीं फेंका जाएगा. अब इससे अगरबत्ती का निर्माण होगा. प्रयागराज नगर निगम की इस पहल से शहर में मंदिरों और धार्मिक स्थल पर फूल के चढ़ावे के बाद उसको कचड़ा में फेंकने के बजाय नगर निगम को सौंप दिया जाएगा. नगर निगम ने इसके लिए एक कंपनी से करार किया है. कंपनी कानपुर की है. जल्द ही नगर निगम कानपुर की कंपनी फूल डॉट कॉम के साथ करार करेगी.

बता दें कि इससे पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रण करने में मदद मिलेगा. साथ ही हर रोज रोशन लाखों-करोड़ों फूल अब बर्बाद नहीं होंगे. अब इससे अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाया जाएगा जिससे घर और आंगन सुगंधित हो जाएंगे. नगर निगम की ये पहल स्वच्छता अभियान के तहत है. बताया जा रहा है कि जल्द ही कानपुर की कंपनी प्रयागराज के नैनी क्षेत्र के जहांगीराबाद में अपना प्लांट लगाएगी. जिसे लगाने के लिए नगर निगम कम्पनी को पैसे नहीं देगी. साथ ही फूल और मालाओं के कचरे से जब अगरबत्ती बन जायेगा तो उसे बेचने के लिए कंपनी खुद ही मार्केटिंग करेगी.

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बता दें कि भगवान और धार्मिक स्थानों पर चढ़ाए जाने फूल को सीधे कचरा में डाल दिया जाता है. जिसके बाद में कचरे से जैविक खाद बनाई जाती है. हालांकि प्रयागराज नगर निगम के मुताबिक फूल और माला धार्मिक आस्था से जुड़ा है. इसलिए इससे अगरबत्ती बनाने पर काम चल रहा है. जानकारी के मुताबिक प्रयागराज में मंदिरों से प्रतिदिन करीब 2 टन फूल और फूलों का माला निकलता है. वहीं नगर आयुक्त रवि रंजन ने कहा कि प्लांट लगाने के लिए कंपनी से जल्द करार होगा. निगम कंपनी को मंदिरों में चढ़ने वाली फूल और मालाओं को इकट्ठा करके देगा. बाकी सारा प्रबंधन कम्पनी खुद करेगी.

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