इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे छात्र, कई की तबीयत बिगड़ी

Shubham Bajpai, Last updated: Fri, 10th Dec 2021, 6:11 AM IST
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से अधिक पैसे लिए जाने और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जुर्माना लगाने के विरोध में अनशन पर बैठे छात्रों में 6 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई है, जिन्हें अस्पताल पर भर्ती कराया गया. इसके बाद भी डीएसडब्ल्यू कार्यालय के बाहर छात्रों का आमरण अनशन जारी है.
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे छात्र, कई की तबीयत बिगड़ी

प्रयागराज. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्र काफी समय से छात्रसंघ की बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. छात्र अपनी मांगों को लेकर करीब 506 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. इस दौरान हॉस्टल में नियम विरुद्ध छात्रों के प्रवेश को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जुर्माना लगाने के विरोध में डीएसडब्ल्यू कार्यालय के बाहर छात्र दो दिन से आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. छात्रों की मांग है कि वो इतनी बढ़ी हॉस्टल फीस जमा नहीं कर सकते हैं. आमरण अनशन कर रहे स्टूडेंट्स में 6 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई. जिसके बाद उसको आनन-फानन में हॉस्टल में भर्ती कराया गया.

इन छात्रों की तबीयत बिगड़ी

छात्रों द्वारा अनशन कर रहे बीएएसी फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स संजीत कुमार, एमए फोर्थ ईयर के विजय सेन, बीएएसी थर्ड ईयर के शिवदीप बाजपेई, बीएएसी थर्ड ईयर के विश्वजीत सिंह, बीए थर्ड ईयर के अनुज सिंह और बीए थर्ड ईयर के आनंद मिश्रा की तबीयत बिगड़ गई. जिसको बेली अस्पताल में भर्ती किया गया. इसके बाद भी अनशन पर बैठे अन्य छात्र मांग कर रहे हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लगाए गए जुर्माने को वापस लिया जाए.

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छात्र हॉस्टल की बढ़ी फीस को लेकर अनशन पर बैठे

छात्रों की मांग है कि बतौर हॉस्टल शुल्क 13 हजार के करीब वार्षिक शुल्क लिया जाता था. लेकिन अब छात्रों से शुल्क बढ़ाकर रहने वाले छात्रों से 15 हजार रुपये लिए जाने के विरोध में 37 से अधिक छात्र अनशन पर बैठे हैं. छात्रों का कहना है कि जो अभी हॉस्टल आए हैं उनसे भी उतना भी उतना ही शुल्क लिया जा रहा है. कोरोना काल में जब देश के कई विश्वविद्यालय में हॉस्टल फीस माफ कर दी गई है. वहीं, यहां फीस बढ़ाना छात्रों के साथ नाइंसाफी है. स्टूडेंट्स की मांग है कि पुरानी हॉस्टल फीस ही ली जाए.

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छात्रों को कुछ हुआ तो विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार

छात्रों का आरोप है कि दो दिन से अनशन पर बैठे छात्रों से विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई नहीं आया बात करने को. यदि इस दौरान किसी छात्र के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसका जिम्मेदार यूनिवर्सिटी प्रशासन होगा. इतनी सर्दी में छात्रों के अनशन पर बैठे होने के बाद भी प्रशासन द्वारा बात न करना उसकी निरंकुशता को दर्शाता है.

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