9 लाख रुपये खर्च कर 12 साल में तैयार हुआ था पूरब का ऑक्सफोर्ड, पहले सेशन में लिया था 13 स्टूडेंट्स ने एडमिशन

Shubham Bajpai, Last updated: Thu, 23rd Sep 2021, 10:31 AM IST
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जिसमें आज हजारों स्टूडेंट्स पढ़कर अपनी भविष्य बना रहे हैं. इसके बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है. 1886 में बनकर तैयार हुई इस यूनिवर्सिटी को तैयार होने में 12 साल लग गए थे. उस वक्त इसकी सभी इमारतों को बनाने में 9 लाख रुपये का खर्च आया था.
9 लाख रुपये खर्च कर 12 साल में तैयार हुआ था पूरब का ऑक्सफोर्ड, पहले सेशन में लिया था 13 स्टूडेंट्स ने एडमिशन

प्रयागराज. एक वक्त देश में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी आईएएस की फैक्ट्री के तौर पर जानी जाती थी. इस यूनिवर्सिटी ने सिर्फ आईएएस ही नहीं देश को कई बड़े राजनेता और उद्यमी भी दिए हैं जिन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि विश्व में भी यूनिवर्सिटी का नाम रोशन किया है. पूरब का ऑक्सफोर्ड कही जाने वाली इस यूनिवर्सिटी को 135 साल से अधिक समय हो गया है. इस यूनिवर्सिटी का उद्घाटन 1886 में वायसराय हिज एक्सीलेंसी लार्ड डफरिन ने किया था. उस वक्त इस यूनिवर्सिटी को बनने में 12 साल का समय लग गया. वहीं, इसकी इमारतों को बनने में 9 लाख रुपये खर्च हुए थे.

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी नहीं म्योर सेंट्रल कॉलेज के नाम से हुई शुरुआत

इतिहासकार प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी ने बताया कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की जब शुरुआत हुई तो इसका नाम म्योर सेंट्रल कॉलेज था. इसके बनने की इच्छा 24 मई 1867 को संयुक्त प्रांत के तत्कालीन गर्वनर विलियम म्योर ने कालेज और यूनिवर्सिटी खोलने की इच्छा जताई थी. जिसके बाद 2873 में उनके नाम पर म्योर कालेज की आधारशिला हिज एक्सीलेंसी द राइट आनरेबल टामस जार्ज बैंकिग बैरन नार्थब्रेक ऑफ स्टेटस सीएमएएसआई द्वारा रखी गई थी.

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1889 को हुई थी पहली प्रवेश परीक्षा

योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि म्योर सेंट्रल कालेज को पहले अनुमान अनुसार 1875 को तैयार होना था, लेकिन इसे पूरा होने में 12 साल का समय लग गया. उस समय के अनुसार, कालेज की इमारतों को तैयार करने में 9 लाख रुपये खर्च हो गए थे. जिसके बाद 8 अप्रैल 1886 को वायसराय हिज एक्सीलेंसी लार्ड डफरिन ने इसका उद्घाटन किया. जिसके बाद 23 सितंबर 1887 को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई और एक्ट पास हुआ. जिसके बाद उस समय कोलकाता, मुंबई और मद्रास के बाद इलाहाबाद भी उपाधि प्रदान करने वाली संस्था बन गया. यूनिवर्सिटी में पहली प्रवेश परीक्षा मार्च 1889 में हुई थी.

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पहले साल सिर्फ 13 लोगों ने लिया था दाखिला

यूनिवर्सिटी के पहले सत्र में सिर्फ 13 लोगों ने ही दाखिला लिया था. उस वक्त इस यूनिवर्सिटी को बनाने में सर विलियम म्योर ने 2 हजार रुपये दान दिए थे. वहीं, तीन साल के लिए दरभंगा कैसल के मालिक से इमारत 250 रुपये प्रतिमाह लीज में पढ़ाई शुरू करने के लिए ली गई थी. पूरी तरह यूनिवर्सिटी 23 सितंबर 1887 को बनकर तैयार हुई थी. 1904 में इंडियन यूनिवर्सिटी एक्ट पास होने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का कार्यक्षेत्र संयुक्त प्रांत आगरा, सेंट्रल प्राविंसेज, राजपूताना एवं सेंट्रल इंडियन एजेंसीज के अधिकांश प्रांत तक सीमित कर दिया गया।

बता दें कि 1887 से 1972 के बीच यूनिवर्सिटी से कम से कम 38 विभिन्न संस्थान एवं कालेज  संबद्ध् हुए। 1921 में जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी एक्ट लागू हुआ तो म्योर सेेंट्रल कालेज का अस्तित्व खत्म हो गया.

 

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