18 साल तक लड़ता रहा केस, मरने के 21 महीने बाद कोर्ट ने फैसले में बताया बेकसूर

ABHINAV AZAD, Last updated: Sun, 10th Oct 2021, 5:33 PM IST
  • साल 1999 के एक मामले में विशेष अदालत ने शिव प्रसाद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई. इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाइकोर्ट में अपील की. अब उनकी मौत के बाद हाइकोर्ट ने अपने फैसले में उन्हें बेकसूर बताया है.
(प्रतीकात्मक फोटो)

रायपुर. दुर्ग जिले के शिव प्रसाद नामक शख्स पर भ्रष्टाचार का आरोप था. अपने ऊपर लगे इस आरोप के खिलाफ वह आजीवन लड़ता रहा. लेकिन 21 माह पहले उसकी मौत हो गई. अब कोर्ट ने अपने फैसले में शिव प्रसाद को बेकसूर करार दिया है. पिछले 18 साल से इस मामले की सुनवाई चल रही थी. दरअसल, पूरा मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का है.

मिली जानकारी के मुताबिक, शिव प्रसाद साल 1999 में फॉरेस्ट बिड गार्ड के पद पर तैनात थे. एक दिन उन्हें जानकारी मिली कि लकड़ी की चोरी हो गई है. जिसके बाद वह मौके पर पहुंचे. वहां पहुंचने के बाद उन्होंने लकड़ी जब्त कर ली. लेकिन बाद में आरोपी ने शिव प्रसाद के खिलाफ हजार रूपए रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई. शिव प्रसाद के खिलाफ इस आरोप की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत शिव प्रसाद को सजा सुना दी.

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शिव प्रसाद ने साल 2003 में विशेष अदालत के इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की. शिव प्रसाद की इस सुनवाई के बाद हाइकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चलती रही. इस दौरान याचिकाकर्ता शिव प्रसाद और उसके परिवार को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इस बीच दिसंबर 2019 में शिव प्रसाद की मौत हो गई. अब इस मामले में कोर्ट का फैसला आया है. कोर्ट ने अपने फैसले में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

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