रायपुर में बने गोबर के दीप से अयोध्या के राम मंदिर को जगमगाने की तैयारी, बढ़ेगा उत्साह

Deepakshi Sharma, Last updated: Fri, 15th Oct 2021, 12:31 PM IST
  • रायपुर में तैयार होने वाले गोबर के दीपों से इस साल अयोध्या का राम मंदिर जगमगाने वाला है. अयोध्या राम मंदिर सज्जा समिति से जुड़े सेवकराम सिंह ने एक लाख दीपों का ऑर्डर दीपवाली के खास मौके पर एक पहल सेवा समिति को दिया है.
गोबार के दीप से जगमगाएगा राम मंदिर 

रायपुर. छत्तीसगढ़ के गोठानों में वैसे तो गोबार से कई सारी चीजें बनाई जा रही है, लेकिन दीपावली के अवसर को देखते हुए यहां बनाए जाने वाले दीपों की मांग काफी अधिक है. सबसे खास बात ये है कि रायपुर में तैयार होने वाले दीपों से इस साल तो अयोध्या का राम मंदिर भी रोशन होने वाला है. अयोध्या राम मंदिर सज्जा समिति से ताल्लुक रखने वाले सेवकराम सिंह ने एक लाख दीपों का ऑर्डर रायपुर की एक पहल सेवा समिति को दिया है.

इसकी आपूर्ति दीपावली से एक हफ्ते पहले करनी है. इसको लेकर समिति द्वारा संचालित गोठानों में काम करने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा दीप बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है. समिति के उपाध्यक्ष रितेश अग्रवाल ने इस बारे में बताया कि गोठानों में गोबर से तीन प्रकार के दीए बनाए जाने वाले हैं. डिजाइनर दीप, 12 दीपों वाली थाली और सादा दीप इसमें तैयार किया जाएगा. अयोध्या के सेवकराम ने सादा दीप का ऑर्डर उन्हें दिया हुआ है. इसकी कीमत दो रुपये प्रति दीप है.

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उन्होंने बताया कि एक शिविर में सेवकराम से मुलाकात हुई थी. उस दौरान उन्हें चर्चा के वक्त पता लगा कि रायपुर में गोबर से दीप बनाए जा रहे हैं, तो वो इसको लेकर रोमांचित हो गए. कुछ दिनों बाद उन्होंने एक लाख दीप का ऑर्डर उन्हें दे दिया. इस दौरान सेवकराम ने इस बात का जिक्र किया कि दीपावली पर अयोध्या के राममंदिर में इन दीपों को जलाया जाएगा. इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ के अलावा आसपास के राज्यों से भी गोबर के दीप के ऑर्डर भी आ रहे हैं.

महिलाओं को मिलेगा रोजगार

इसके अलावा रितेश ने बताया कि गोबर से लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां बनाई जा रही है. इससे महिलाओं को रोजगार मिल रहा है. रितेश ने बताया कि वाट्सएप ग्रुप से भी ऑर्डर लिया जा रहा है.

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ऐसे बनाए जाते हैं गोबर के दीप

गोठान में काम करने वाली महिलाओं ने इस बात का जिक्र किया कि गोबर को कंडा बनाने के बाद उसका पाउडर बना लिया जाता है. उसमें लकड़ी का बुरादा और फिर गोंद मिलाई जाती है. उसका एक पेस्ट बनाया जाता है, जिसे मशीनों में डालकर दीप तैयार कर लिया जाता है. सूखने के बाद इन दीपों को चून के पानी में डुबो दिया जाता है.

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