मजदूर के बेटी के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये खर्च करेगी कंपनी, अमेरिका से आएगा इंजेक्शन

Indrajeet kumar, Last updated: Sun, 21st Nov 2021, 11:02 AM IST
  • छत्तीसगढ़ में साउथ ईस्टर्न कोल फिल्ड्स लिमिटेड अपने कंपनी में काम करने वाले मजदूर की बेटी के इलाज के लिए 16 करोड़ खर्च करने का फैसला लिया है. कंपनी में काम करने वाले मजदूर सतीश कुमार की बेटी मस्क्यूलर एट्रॉफी नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित है. इस बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका से इंजेक्शन मंगवाना पड़ेगा.
मस्क्यूलर एट्रॉफी नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित सृष्टि

रायपुर. छत्तीसगढ़ में कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोल फिल्ड्स लिमिटेड अपने कंपनी में काम करने वाले मजदूर की बेटी के इलाज पर 16 करोड़ खर्च करने वाला है. कंपनी ये खर्च गंभीर बीमारी के इलाज में लगने वाले इंजेक्शन खरीदने में करने वाली है. इलाज के लिए रकम की मंजूरी मिल गई है. सतीश कुमार नाम के एक आदमी साउथ ईस्टर्न कोल फिल्ड्स लिमिटेड के दीपका कोयला क्षेत्र में काम करते हैं. उनकी 2 साल की बेटी सृष्टि रानी स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित है. इस बीमारी से ग्रसित मरीज के स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन स्टेम में नर्व सेल की कमी से मांसपेशियां सही तरीके से काम नहीं कर पातीं हैं. धीरे धीरे ये बीमारी बढ़ती गई. जन्म के 6 महीने के बाद ही सृष्टि बीमार रहने लगी. कोविड आने के बाद उसके माता-पिता उसके बेहतर इलाज के लिए उसे बाहर नहीं ले जा सके. और स्थानीय अस्पताल में उसका इलाज चलता रहा.

दिसंबर 2021 में पता चली बीमारी

सृष्टि के स्थिति में कोई सुधार ना होने के बाद दिसंबर 2020 में बच्ची को लेकर क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर गए. जहां उन्हें इस बीमारी के बारे में पता चला. क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने इलाज के लिए जोलजेंस्मा इंजेक्शन की जरूरत बताई. जिसके बाद सतीश अपनी बेटी को लेकर घर लौटे रहे थे कि रास्ते में सृष्टि कि तबीयत अचानक से बिगड़ गई. जिसके बाद उसे SECL से इंपैनल्ड अपोलो अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कराया गया. यहाँ काफी समय तक इलाज करने के बाद सतीश ने एम्स दिल्ली में सृष्टि का इलाज कराया. फिलहाल सृष्टि का इलाज घर पर ही चल रहा है, उसके पोर्टेबल वेंटिलेट पर रखा गया है.

महंगी इंजेक्शनके कारण छूट गई इलाज की उम्मीद

डॉक्टरों ने बताया कि इस गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अमेरिकन इंजेक्शन की जरूरत है. इस इंजेक्शन को किसी इंडियन रेगुलटर ने अप्रूव नहीं किया है, लेकिन अमेरिका के रेगुलटर ने इसके इस्तेमाल की मंजूरी दी है. इस इंजेक्शन की कीमत लगभग 2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 16 करोड़ रुपए होगी. इतनी अधिक कीमत होने के कारण सतीश और उनकी पत्नी को कुछ सूझ ही नहीं रहा था.

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आगे आई SECL कंपनी

SECL के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सनीश चंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कंपनी प्रबंधन ने सतीश की समस्या को देखते हुए मदद करने का फैसला लिया. इसके लिए कोल इंडिया के अप्रूवल की जरूरत थी. जिसके बाद कोल इंडिया के चेयरमेन ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए. डॉ. सनीश चंद्र का कहना है कि कंपनी ने न सिर्फ अपने परिवार की बेटी की जान बचाने के लिए बड़ी कोशिश की है बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य उपक्रमों और दूसरे संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश किया है.

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