मारा गया पढ़ा-लिखा 50 लाख का इनामी मिलिंद तेलतुम्‍बडे, अब तक 26 नक्सली ढेर, 3 जवान भी घायल

MRITYUNJAY CHAUDHARY, Last updated: Sun, 14th Nov 2021, 10:25 AM IST
  • मिलिंद पुणे पुलिस के एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव जातिगत दंगों के मामले में वांछित आरोपी था. उस पर 50 लाख रुपये का इनाम था. वहीं आज मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं , जबकि 26 नक्सलियों को मार गिराया गया है.
मारा गया पढ़ा-लिखा 50 लाख का इनामी मिलिंद तेलतुम्‍बडे, अब तक 26 नक्सली ढेर, 3 जवान भी घायल

रायपुर. छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर गढ़चिरौली में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस ने जंग छेड़ रखी है. इसी कड़ी में शनिवार को हुई मुठभेड़ में 26 नक्सलियों समेत कुख्यात और खूंखार नक्सली मिलिंद तेलतुम्बडे भी मारा गया. मिलिंद पुणे पुलिस के एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव जातिगत दंगों के मामले में वांछित आरोपी था. उस पर 50 लाख रुपये का इनाम था. वहीं आज मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं , जबकि 26 नक्सलियों को मार गिराया गया है. घटना स्थल पर जवान अब भी मौजूद हैं. 

गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल ने रविवार को हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि "प्राथमिक पहचान के अनुसार, तेलतुंबडे शनिवार की मुठभेड़ में मारे गए 26 माओवादियों में से एक था." एसपी ने आगे कहा कि मारे गए अन्य माओवादियों की पहचान की जा रही है.

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चलाया गया सी-60 यूनिट को ऑपरेशन 

जानकारी के मुताबिक, फोर्स को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गढ़चिरौली के ग्यारापट्टी के जंगल में भारी संख्या में कई हथियारबंद नक्सली मौजूद हैं. मुखबिर की इसी सूचना के आधार पर शनिवार की सुबह महाराष्ट्र पुलिस के सी-60 यूनिट को ऑपरेशन के लिए निकाला गया था. जैसे ही जवान इस इलाके के जंगलों में पहुंचे तो माओवादियों ने जवानों पर फायर खोल दिया था. जवाबी कार्रवाई में फोर्स ने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. कई घंटे तक पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चली. जिसमें जवानों ने 26 नक्सलियों को ढेर कर दिया है. मौके से भारी मात्रा में हथियार समेत सामान भी बरामद किया गया है. 

जानिए कौन था  मिलिंद तेलतुम्बडे

नक्सली कमांडर दीपक तेलतुंबडे उर्फ मिलिंद बाबूराव तेलतुंबडे माओवादियों के सबसे सीनियर पदाधिकारियों में से एक था. वह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जोन का विशेष क्षेत्र सचिव था. नक्सली नेता को एक नया क्षेत्र बनाने का काम दिया गया था. उसे नक्सलियों के लिए आसान रास्ता और सीनियर नेताओं के लिए सुरक्षित जगह बनाने का काम दिया गया था. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दीपक तेलतुंबडे लगातार एमएमसी क्षेत्रों का दौरा कर रहा था. उसने एमएमसी के विस्तार दलम नाम के कमांडो यूनिट के लिए करीब 100 स्थानीय लोगों की भर्ती भी की थी.

तेलतुम्बडे जंगलों में भारी हथियारों से लैस अंगरक्षकों और माओवादियों की एक प्लाटून के साथ घूमते थे. पुलिस अधिकारी के मुताबिक 2018 में सरेंडर करने वाले सीनियर नक्सली नेता पहाड़ सिंह ने बताया कि क्षेत्र के सभी बड़े फैसले दीपक ही लेता था. उसने ही साल 2016 में हुई एक बैठक में अमरकंटक को एमएमसी के ‘आधार क्षेत्र’ के रूप में विकसित करने के की बात कही थी. उनके बड़े भाई जाने-माने शिक्षाविद आनंद एल्गर परिषद मामले में जेल में हैं. आनंद की पत्नी भीमराव अंबेडकर की पोती हैं.

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