रायपुर: कोरोना से मरने वालों की आत्मा की शांति के लिए आधी रात को महादेवघाट श्मशान काली की पूजा

ABHINAV AZAD, Last updated: Sat, 4th Dec 2021, 11:14 AM IST
  • रायपुर के खारुन नदी तट पर स्थित श्मशानघाट में विशाल बरगद वृक्ष के नीचे चतुष्कोणास्त्र हवन कुंड में कोरोना महामारी के ज्ञात अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के लिए मां काली की तांत्रिक विधि से पूजा-अर्चना की गई.
(प्रतीकात्मक फोटो)

रायपुर. खारुन नदी तट पर स्थित श्मशानघाट में विशाल बरगद वृक्ष के नीचे चतुष्कोणास्त्र हवन कुंड में मां काली की तांत्रिक विधि से पूजा-अर्चना की गई. दरअसल, कोरोना महामारी के ज्ञात अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के लिए यह आयोजन किया गया. इस हवन में विशेष द्रव्यों के साथ ही पांच मन सूखी लाल मिर्च से आहुति दी गई. साथ ही नारायण नाग बलि पूजा करके श्राद्ध कर्म संपन्न किया गया.

श्यामा तंत्र पीठिक का एवं श्याम आध्यात्म पीठ के अध्यक्ष चरण सिंह सोनवानी एवं सचिव आशीष देवांगन के मुताबिक, अगहन माह की अमावस्या तिथि पर तांत्रिक विधि से पूजा-अर्चना की गई. मां काली के बीज मंत्रों से पांच मन लाल मिर्च से आहुति दी गई. उन्होंने बताया कि रातभर हवन-पूजन के बाद ब्रह्म मुहूर्त में आरती करके पुष्पाजंलि दी गई. साथ ही उन्होंने बताया कि मां तारापीठ पश्चिम बंगाल एवं मां कामाख्या पीठ से आए आचार्यों ने हवन संपन्न करवाया.

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बताते चलें कि लगातार 12वें साल श्यामा तंत्र पीठिका के नेतृत्व में श्मशान काली की पूजा और हवन का आयोजन किया गया. दरअसल, 12वां वर्ष होने से इसे कल्प उत्सव के रूप में मनाया गया. पीठ के सदस्यों के मुताबिक, आद्या महाशक्ति काली का नाम प्रलय रात्रि के मध्यकाल से संबंध रखता है. रात्रि का मध्यकाल महानिशा को हवन, पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. अमावस्या की रात 12 बजे का समय आद्याशक्ति का माना गया है. इस समय समस्त सृष्टि निद्रामग्न होती है और मां काली जागृत होती है.

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